राजस्थान को रजवाड़ों की भूमि कहा जाता है। इसी राजस्थान में माउंट आबू हिल स्टेशन है, जिसे कई लोग जन्नत करार देते हैं। यहां की झीलें, पहाड़ और ढेर सारे मंदिर लोगों को लुभाते हैं। मंदिर पौराणिक महत्व के हैं, जिनकी हिंदू धर्म में विशेष मान्यता है। पौराणिक महत्व होने के कारण हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।
माउंट आबू का इतिहास बेहद दिलचस्प है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार यहां 33 करोड़ देवी-देवताओं ने निवास या यात्रा की थी। धार्मिक कथाओं के अनुसार महान संत वशिष्ठ इसी पर्वत पर रहते थे और धरती को राक्षसों से बचाने के लिए यज्ञ और पूजा-अर्चना करते थे। इसके अलावा भी यहां कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं। अब सवाल उठता है कि माउंट आबू में कौन-कौन से मंदिर हैं और वहां कैसे पहुंचा जा सकता है।
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क्या है माउंट आबू की पौराणिक मान्यता?
'माउंट आबू' नाम अंग्रेजों के समय में प्रचलित हुआ। इससे पहले इसका नाम अर्बुदांचल था। इस नाम से जुड़ी एक पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार, जब भगवान शिव के वाहन नंदी एक गहरी खाई में गिर गए थे, तब ‘अर्बुद’ नामक एक नाग ने उन्हें बाहर निकाला। उसी नाग के नाम पर इस स्थान का नाम अर्बुदांचल पड़ा। बाद में अंग्रेजों ने इसका नाम बदलकर माउंट आबू रख दिया।
माउंट आबू के प्रमुख मंदिर
माउंट आबू में कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर हैं। यहां सात ऐसे मंदिर हैं, जहां लोग खूब जाते हैं-
1. अर्बुदा देवी मंदिर- देवी अर्बुदा को मां कात्यायनी का रूप माना जाता है। मान्यता है कि मां कात्यायनी का एक अंग यहां गिरा था, इसलिए यहां अर्बुदा देवी का मंदिर स्थापित हुआ। नवरात्रि के समय यहां विशेष पूजा होती है और बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं।
2. श्री रघुनाथ मंदिर- यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री रघुनाथ जी को समर्पित है। यह मंदिर नक्की झील के तट पर स्थित है और लगभग 650 वर्ष पुराना माना जाता है। इसका निर्माण 14वीं शताब्दी में वैष्णवों द्वारा कराया गया था। मान्यता है कि यहाँ दर्शन करने से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं।
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3. गौमुख मंदिर- इस मंदिर में संत वशिष्ठ की पूजा की जाती है। माना जाता है कि यहीं संत वशिष्ठ ने यज्ञ किया था। मंदिर का धार्मिक महत्व आज भी बना हुआ है।
4. अचलेश्वर महादेव मंदिर- यह मंदिर अचलगढ़ किले के पास स्थित है। मान्यता है कि यहाँ शिवजी के अंगूठे के निशान हैं और उसी स्थान पर शिवलिंग की पूजा की जाती है।
5. शंकर मठ मंदिर- यह मंदिर वर्ष 1977 में बना था। यहाँ लगभग 9.5 फीट लंबा और 7.5 फीट चौड़ा विशाल शिवलिंग स्थापित है, जो इसे विशेष बनाता है।
6. स्वामीनारायण मंदिर- यह मंदिर स्वामीनारायण संप्रदाय के प्रमुख मंदिरों में से एक है। सुंदर पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी भव्यता के लिए प्रसिद्ध है।
7. दिलवाड़ा जैन मंदिर- यह जैन मंदिर अरावली पहाड़ियों के बीच स्थित है। इसका निर्माण 11वीं से 13वीं शताब्दी के बीच विमल शाह द्वारा कराया गया था। संगमरमर की बारीक नक्काशी के लिए यह मंदिर विश्वभर में प्रसिद्ध है।
कैसे पहुंचे माउंट आबू?
माउंट आबू का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा महाराणा प्रताप हवाई अड्डा (उदयपुर) है। आप देश के किसी भी राज्य से विमान द्वारा उदयपुर पहुंच सकते हैं। उदयपुर से माउंट आबू लगभग 3 घंटे की दूरी पर है। इसके अलावा, आप ट्रेन से भी उदयपुर या आबू रोड रेलवे स्टेशन तक पहुंच सकते हैं। वहां से टैक्सी या बस द्वारा आसानी से माउंट आबू पहुंचा जा सकता है। इस प्रकार, अर्बुदांचल यानी माउंट आबू प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम है, जहां इतिहास, पौराणिक कथाएं और श्रद्धा एक साथ देखने को मिलती हैं।
