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खाटू श्याम का लक्खी मेला शुरू, मान्यता से महत्व तक, पढ़ें हर सवाल का जवाब

 भगवान खाटूश्याम जी के मंदिर के पास आज से मेला शुरू हो रहा है। इस मेले को लक्खी मेला कहा जाता है। इस मेले की मान्यता क्या है जानिए 

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खाटूश्याम मंदिर, Photo Credit- X

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राजस्थान के सीकर जिले में बाबा खाटूश्याम  मंदिर है। जहां आज से लक्खी मेला शुरू हो रहा है। इस मेले में जाने के लिए लाखों लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। अब देश और दुनिया के लोग आज से मेले में शामिल हो सकते है। राजस्थान के इस मेले में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक के लोग पहुंचते हैं।

 

लक्खी मेला खाटूश्याम मंदिर द्वारा आयोजित किया जा रहा है। मंदिर के समिति ने बताया कि यह मेला 28  फरवरी तक चलेगा। मतलब 8 दिन तक यह मेला चलेगा। मंदिर कमेटी ने अनुमान लगाया है कि इस बार मेले में करीब 35 लाख श्रद्धालु आएंगे। मंदिर कमेटी ने श्रद्धालुओं को सुरक्षित मेला और भगवान दर्शन की व्यवस्था की है। 

 

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इस मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा का ध्यान हर वक्त पुलिस प्रशासन कर रही है। मेले में आने वाले लोगों के लिए पुलिस ने कुछ गाइडलाइन जारी किया है। साथ सीकर से मंदिर पैदल आने वाले भक्तों के लिए एक अलग कोरीडोर बनाया गया है, जिससे गाड़ी से आने वाले भक्त पैदल आएं। मेले में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर परिसर में 14 लाइनें बनाई गईं हैं। इस मेले की भव्यता को देखते हुए लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है। इस मेले की मान्यता क्या है, यह मेला हर साल फाल्गुन माह में ही क्यों लगाया जाता है? इन्हीं सवालों के जवाब जानिए इस रिर्पोट में-

 

लक्खी मेला की मान्यता क्या है?

लोगों की धार्मिक मान्यता के अनुसार बर्बरीक (बाबा खाटूश्याम ) जो घटोत्कच के बेटे और भीम के पोते थे। बर्बरीक ने अपनी मां से वादा किया था कि वह महाभारत युद्ध में हारने वालों का साथ देगे और हारने वाले को युद्द में जीताएगें। जिसके बाद भगवान बर्बरिक के सामने श्री कृष्ण भगवान एक साधु का रूप धारण आए। कृष्ण भगवान ने गुरू दक्षिणा के तौर पर बर्बरिक शीश मांगा जिसके बाद बर्बरिक को बिना किसी संकोच के अपना सिर श्री कृष्ण के चरणों सौप दी।


बर्बरिक भगवान की ईमादारी देख कृष्ण भगवान खुश हो गए। इसके बाद कृष्ण भगवान ने बर्बरिक भगवान को आर्शवाद दिया कि भगवान बर्बरिक को कलियुग में लोग पूजेंगे साथ ही उन्हें श्याम नाम से पूजा जाएगा। इसी वजह से आज भी ख्याटू श्याम भगवान को लोग श्रद्धा भाव से पूजते हैं। लोगों की मान्यता है कि ख्याटू श्याम भगवान हारे को सहारा देते है।

 

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यह मेला फाल्गुम माह में इसलिए मनाया जाता है। क्योंकि खाटूश्याम  भगवान ने इसी माह में अपना शीश दान किया था। मध्यता है कि इस महिने में जो भी भक्त खाटूश्याम भगवान के दर्शन करते हैं, भगवान उनका मनोकामना जरूर पूरी करते हैं। 

सुरक्षा के लिए इंतजाम

 

लक्खी मेले में लोगों  की सुरक्षा के लिए 5000 पुलिस हर वक्त तैनात रह रहे हैं। जगह- जगह लोगों की सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरा लगया गया है। इस मेले में लाखों लोग आने वाले हैं, इसलिए भीड़ को नियंत्रण करने के लिए 14 लाइनें बनाईं गई हैं। इन लाइनों से गुजर कर लोग बाबा खाटूश्याम  का दर्शन कर पाएगें। जानकारी के लिए बता दे कि इस मेले में लोगों बीआईपी दर्शन नहीं मिल पाएगी। 

 

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 जिला प्रशासन के गाइड लाइन 

 

इस मेले में सुरक्षा बनाए रखने के लिए सीकर जिला प्रशासन ने कुछ जरूरी गाइड लाइन बनाए है। इन नियमों को सभी लोगों का मानना अनिवार्य है। लक्खी मेले में लोगों डिजे (DJ) बनाने पर प्रतिबंध लगाया है। ताकि मंदिर के आस- पास डिजे (DJ) का शोर न हो। मेले में इत्र और काटेदार गुलाब का फुल ले जाना भी प्रतिबंधित है।

 

कैसे पहुंचे मंदिर

राजस्थान का खाटू श्याम मंदिर सीकर में स्थित है। जहां जाने के लिए लोग ट्रेन, बस या प्लेन से जा सकते हैं। अगर आप प्लेन से जा रहे हैं तो अपने शहर से जयपुर जा सकते हैं। जयपुर से सीकर कुछ किलोमीटर दूर है तो आपको टैक्सी या बस लेनी होगी। तब आप खाटू श्याम मंदिर पहुंच जाएंगे।


अगर आप ट्रेन से खाटू श्याम मंदिर जा रहे हैं तो मंदिर के सबसे पास रिंगास जंक्शन स्टेशन पर उतर जाएं। इस स्टेशन से कुछ किलोमीटर की दूरी पर मंदिर है। जहां आप टैक्सी या बस में बैठकर जा सकते हैं।

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