भारत में आमतौर पर लोग घरों में सबसे ज्यादा कुत्ते को रखना पसंद करते हैं। कुत्ते को इंसान का सबसे बढ़िया साथी माना जाता है और कुत्ते की वफादारी के किस्से तो हम सभी ने सुने ही हैं। सोशल मीडिया पर भी कई रील्स वायरल होती हैं जिनमें कुत्ता अपने मालिक के घर आते ही उससे प्यार करता है, गेट पर लंबे समय तक इंतजार करता है और सुबह उठते ही आपसे प्यार करता है। बच्चों की तरह आपके साथ खेलता है। यही कारण है कि कुत्ता पालना ज्यादातर लोगों का शौक होता है। 

 

कुत्ता घर के एक मेंबर की तरह होता है और इंसान की तरह उसे भी देखभाल की जरूरत होती है। कु्त्ता खरीद कर घर लाना बहुत आसान है लेकिन उसकी देखभाल करना और जरूरतों को पूरा करना बहुत मुश्किल है। कुत्ते को कई ऐसी बीमारियां होती हैं,  जो उसको तो परेशान करती ही हैं लेकिन साथ में आपके लिए भी खतरा हो सकती हैं। पालतू कुत्ते को सिर्फ प्यार से पालना और उसके साथ खेलना ही काफी नहीं बल्कि उसकी सेहत का ध्यान रखना भी उतना ही जरूरी है। खबरगांव की पेट कथा सीरीज में आज हम आपको कु्त्तों को होने वाली बीमारियों के बारे में बताएंगे साथ ही उनसे बचने के तरीकों पर भी चर्चा करेंगे।

 

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कुत्तों में कई आम बीमारियां

जिस तरह एक मां अपने बच्चे का ध्यान रखती है, उसे डॉक्टर के पास लेकर जाती है, टीके लगवाती है और बढ़िया खाना देती है, ठीक उसी तरह कुत्ते को भी देखभाल की जरूरत होती है। कुत्तों के लिए भी नियमित टीकाकरण, सही खान-पान और समय-समय पर  वजन चेक करना बहुत जरूरी होता है। कई बार कुत्ता कुछ ऐसी हरकतें करता है जो गंभीर बीमारी के लक्ष्ण होती हैं लेकिन हम उनको समय रहते पहचान नहीं पाते। जैसे इंसान को सर्दी, जुकाम कई बार हो जाता है, ठीक इसी तरह कुत्ते को भी कई बीमारियां हो जाती हैं। 

सबसे खतरनाक रेबीज

कुत्तों में सबसे खतरनाक बीमारी रेबीज मानी जाती है। यह एक वायरल संक्रमण है और अगर आपको किसी संक्रमित कुत्ते ने काट लिया या खरोंच मार दी तो यह आपको यानी इंसान को भी हो सकता है। रेबीज से इंसान और कुत्ते दोनों प्रभावित होते हैं। अक्सर कुत्तों के काटने से इंसान में रेबीज फैलने की खबरें आती रहती हैं और यह पूरी दुनिया में चिंता का विषय बना हुआ है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के डेटा से पता चलता है कि दुनियाभर में रेबीज कितनी बड़ी समस्या है। 

 

रेबीज के लक्षण में तेज बुखार, सिरदर्द, आए दिन दर्द-खुजली, भ्रम और व्यवहार में बदलाव शामिल हैं। इस बीमारी से बचने का एक ही तरीका है कि कुत्ते को समय रहते डॉक्टर की सलाह के अनुसा समय पर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवा दिया जाए। कुत्ते को कई बार रेबीज के टीके अलग-अलग समय अंतराल पर लगाए जाते हैं। अगर आपको किसी कुत्ते ने काट लिया है तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं। अगर आपके पालतू कुत्ते ने आपको काट लिया है तो उसका वैक्सीन रिकॉर्ड भी चेक कर लें। 

 

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पैरवोवायरस 

पैरवोवायरस (Parvovirus) को की बार लोग पार्वो भी कहते हैं। यह बीमारी भी एक संक्रामक बीमारी है और कम उम्र के पिल्ले इसका ज्यादा शिकार होते हैं। यह बीमारी कुत्ते की आंतों को प्रभावित करती है और कुत्ते को उल्टी, दस्त जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बिना इलाज के यह पिल्लों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। धूल-मिट्टी, कुत्ते की पोटी या इंसानी मल या फिर किसी अन्य दूषित चीज के संपर्क में आने से यह फैलती है।

 

आमतौर पर पैरवोवायरस की वैक्सीन पहले एक महीने में ही लगा दी जाती है। लोगों को सलाह दी जाती है कि अगर वह कुत्ता खरीदने जाएं तो उसका मेडिकल टेस्ट पहले ही करवा लें और यह जांच लें की कहीं उसे पैरवोवायरस तो नहीं है। इस बीमारी से बचने का एक ही इलाज है और वह है समय पर टीकाकरण। इस बीमारी की वैक्सीन कुत्ते के पिल्ले को पहले महीने से ही लगनी शुरू हो जाती है और बड़े होने तक कुछ-कुछ महीनों बाद लगती है। अगर कुत्ते को यह बीमारी हो गई है तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाएं।  

ब्लोटिंग 

कई बार लोग शिकायत करते हैं कि उनका कुत्ता कुछ समय पहले तक तो ठीक था लेकिन 1-2 दिन बीमार रहने के बाद ही उसकी मौत हो गई। ऐसा ब्वोटिंग के कारण हो सकता है। ब्लोटिंग एक ऐसी समस्या है जो अचानक गंभीर रूप ले सकती है और आम तौर पर बड़ी नस्लों के कुत्तों में यह बीमारी होती दिखती है। इस बीमारी में पेट में गैस बहुत ज्यादा बन जाती है। इसमें खून सही से शरीर में नहीं बह पाता, जिससे शरीर पर असर पड़ता है। आमतौर पर रात के खाने के बाद यह दिक्कत होती है। इसमें कुत्ते को बहुत ज्यादा दर्द होता है। कई बार वह उछलकूद भी करता है और उसे बेचैनी महसूस होती है। 

 

अगर आपने कुत्ता पाल रखा है और कभी आपको लगता है कि पका कुत्ता अचानक दर्द में है, पेट बहुत फूला हुआ दिख रहा है और रोने जैसा व्यवहार कर रहा है तो यह इमरजेंसी हो सकती है। ऐसे में तुरंत वेट हॉस्पिटल ले जाना चाहिए। अगर आपके कुत्ते को इस तरह के लक्ष्य दिखाई दे रहे हैं तो आपको बचाव के तौर पर कुत्ते को ज्यादा भारी खाना नहीं देना है। दिनभर कुछ-कुछ समय में हल्का खाना देना चाहिए और कुत्ते को शारीरिक एक्टिविटी भी समय-समय पर करवानी होती है। 

इन्फेक्शियस ट्रैकियल डिजीज

यह बीमारी कुत्तों के सांस लेने के सिस्टम (श्वसन तंत्र) को प्रभावित करती है और खासकर तब फैलती है जब कई कुत्ते एक साथ होते हैं। खांसी, नाक बहना और थकान इसके मुख्य लक्षण हैं। यह आमतौर पर गंभीर नहीं होती, लेकिन अगर समय रहते इलाज नहीं मिलता तो फेफड़ों तक संक्रमण फैल सकता है। 

 

इस बीमारी को रोकने के लिए 'केनेल कफ वैक्सीन' लेना और संक्रमित कुत्तों से दूरी रखना सबसे बेहतर उपाय है। इलाज में वेट डॉक्टर अक्सर खांसी को कम करने के लिए सपोर्टिव थेरेपी, कफ सिरप और आराम की सलाह देते हैं। अगर कुछ दिन कुत्ते की ठीक से देखभाल की जाए तो यह बीमारी कुछ ही दिनों में कंट्रोल हो सकती है। 

 

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स्किन एलर्जी

स्किन (त्वचा) संबंधी समस्याए जैसे फ्ली, टिक, एलर्जी और फंगल संक्रमण कुत्तों में बहुत आम हैं। खुजली, बाल झड़ना, लाल चक्कते यह इसके मुख्य लक्षण हैं। गर्मियों में और बरसात के मौसम में कुत्तों में यह बीमारियां तेजी से फैलते हैं और कु्त्ते इससे बहुत परेशान हैं। कुत्तों से यह बीमारी इंसानों में भी फैल सकती है। इसके लिए आप कुत्ते की सही से देखभाल, गंदगी से बचाना और समय-समय पर नहलाकर बचा सकते हैं। इसमें सलाह दी जाती है कि अगर कुत्ते में इसके लक्ष्ण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

हर रोज रखें कुछ बातों का ध्यान

पालतू कुत्ता बीमारियों से तभी बच सकता है जब आप उसके स्वास्थ्य पर लगातार ध्यान दें। हर रोज संतुलित खाना देना, समय-समय पर टीकाकरण करवाना और कुत्ते की हरकतों पर नजर रखना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही कुत्तों को चॉकलेट, तेज मसाले, लहसुन जैसी चीजें ना दें क्योंकि इनको खाने से भी पेट की बीमारी या फिर कोई अन्य दिक्कत हो सकती है। आमतौर पर कुत्ते के लक्ष्ण देखकर ही आप इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है।