भारत में आज कुत्ता पालना सिर्फ शौक नहीं रहा बल्कि लाइफस्टाइल बन चुका है। सुबह मॉर्निंग वॉक में साथ चलने वाला दोस्त हो या घर में अकेलापन दूर करने वाला फैमिली मेंबर, डॉग्स अब हर उम्र के लोगों की जिंदगी का हिस्सा हैं। सोशल मीडिया पर रील लाइफ से लेकर रियल लाइफ तक डॉग पैरेंट्स का क्रेज इतना बढ़ गया है कि लोग नस्ल से लेकर ब्लडलाइन तक पर खुलकर खर्च कर रहे हैं। भारत में देशी नस्ल के कुत्तों से ज्यादा आज विदेशी नस्लों के कुत्तों का क्रेज बहुत ज्यादा बढ़ गया है। विदेशी नस्ल का कुत्ता खरीदने और उसको पालने के लिए लोग लाखों रुपये खर्च करने को तैयार हो जाते हैं।
छोटे शहर हों या बड़े शहर, हर जगह डॉग लवर्स की संख्या तेजी से बढ़ी है। गांवों में भी अब विदेशी कु्त्तों का चलन बढ़ गया है। पहले कुत्तों को पालने बड़े बंगलों तक सीमित था लेकिन अब लोग अपार्टमेंट में भी पेट डॉग रख रहे हैं। कुत्ते को एक फैमिली मेंबर की तरह रखना कल्चर बनता जा रहा है। जहां भी जाओ अपने डॉग को साथ ले जाओ। सोशल मीडिया पर डॉग पैरेंट्स जैसे हैशटैग कई बार ट्रेंड भी करते हैं। इन हैशटैग के साथ लोग जमकर फोटो भी शेयर करते हैं। लोग आपके पैट डॉग को देखकर आपको जज कर लेते हैं। ऐसे में बढ़िया नस्ल का पैट डॉग रखना भी एक टास्क बनता जा रहा है।
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सबसे मशहूर नस्ल
भारत में सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली नस्लों की बात करें तो लैब्राडोर रिट्रीवर का नाम सबसे ऊपर आता है। यह नस्ल अपने शांत स्वभाव और फैमिली फ्रेंडली नेचर के लिए जानी जाती है। बच्चों के साथ इसका बॉन्ड काफी स्ट्रॉन्ग होता है और ट्रेनिंग भी आसानी से सीख लेता है। भारत में लैब्राडोर पपी (कुत्ते का छोटा बच्चा) की कीमत आमतौर पर 10 हजार से 35 हजार रुपये के बीच होती है। अच्छी ब्लडलाइन और सर्टिफाइड ब्रीडर से लेने पर यह कीमत और बढ़ सकती है। खाने पीने और हेल्थ के हिसाब से इसका मंथली खर्च 4 से 6 हजार रुपये तक आ सकता है।
गोल्डन रिट्रीवर की समझदारी के दिवाने
लैब्राडोर के बाद गोल्डन रिट्रीवर भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। यह कुत्ता दिखने में जितना खूबसूरत होता है उतना ही समझदार भी होता है। सोशल मीडिया से फऐमिली ग्रुप्स तक में इस प्यारे कुत्ते के चर्चे होते हैं। सोशल मीडिया पर इसकी रील्स और फोटो काफी वायरल रहती हैं। भारत में गोल्डन रिट्रीवर की कीमत करीब 15 से 45 हजार रुपये तक जाती है। इसके लंबे बालों की वजह से ग्रूमिंग पर भी खर्च आता है और गर्मियों में खास केयर की जरूरत होती है। हालांकि, अपने लंबे बालों की वजह से यह बहुत प्यारा लगता है।
फैमिली गार्ड जर्मन शेफर्ड
जर्मन शेफर्ड को भारत में लंबे समय से भरोसेमंद नस्ल माना जाता है। पहले यह सिर्फ पुलिस और सिक्योरिटी में दिखता था लेकिन अब घरों में भी यह एक शानदार गार्ड और फैमिली डॉग बन चुका है। यह काफी एक्टिव और इंटेलिजेंट होता है इसलिए इसे रोज एक्सरसाइज और ट्रेनिंग की जरूरत होती है। भारत में जर्मन शेफर्ड की कीमत करीब 20 से 50 हजार रुपये तक होती है।
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क्यूट फेस वाली नस्लें
कई लोग जर्मन शेफर्ड जैसे खतरनाक कुत्तों के बजाया छोटे घरों में पग और बीगल जैसी नस्लों के कुत्तों को रखना पसंद करते हैं। पग अपने क्यूट फेस और कम एक्टिविटी लेवल की वजह से बुजुर्गों और छोटे परिवारों को पसंद आता है। इसकी कीमत 15 से 30 हजार रुपये के बीच होती है। वहीं बीगल थोड़ा ज्यादा एक्टिव होता है और वॉकिंग लवर्स के लिए परफेक्ट माना जाता है। बीगल की कीमत भी लगभग इसी रेंज में आती है।
वायरल डॉग
सोशल मीडिया पर आजकल छोटा खिलौने जैसे कुत्ते काफी वायरल होते हैं। पोमेरेनियन और शिह तजू नस्ल के कुत्ते चलते हुए बहुत ज्यादा क्यूट लगते हैं और युवाओं में खासकर Gen-Z में यह कुत्ते बहुत ज्यादा मशहूर होते हैं। इन्हें रहने के लिए बहुत कम जगह चाहिए होती है। अगर इनकी कीमत की बात करें तो पोमेरेनियम की कीमत 5 हजार से 20 हजार रुपये तक हो सकती है और शिह तजू की कीमत 25 हजार से 60 हजार रुपये तक जाती है। इन नस्लों के कुत्ते जितने क्यूट होते हैं उन्हें रेगुलर ग्रूमिंग की जरूरत भी उतनी ही होती है। इससे खर्च भी बढ़ जाता है।
साइबेरियन हस्की
पिछले कुछ सालों में साइबेरियन हस्की का क्रेज सोशल मीडिया की वजह से बहुत तेजी से बढ़ा है। नीली आंखें और वुल्फ जैसा लुक लोगों को इसकी ओर आकर्षित करता है लेकिन हर जगह इसको रखना आसान नहीं है। एक्सपर्ट्स लगातार चेतावनी देते हैं कि यह नस्ल भारत के मौसम के लिए नेचुरली फिट नहीं है। हस्की को ठंडा वातावरण चाहिए और इसका मेंटेनेंस खर्च काफी ज्यादा होता है। गर्मियों में यह कुत्ते बहुत ज्यादा परेशान रहते हैं और ऐसा वातावरण में उन्हें रखना उनके साथ अत्याचार करने जैसा है। भारत में हस्की की कीमत 60 हजार रुपये से लेकर 1 लाख 50 हजार रुपये तक पहुंच सकती है।
देसी नस्ल के कुत्ते भी मशहूर
अब बात करें देसी नस्लों की तो इंडियन पैरियाह डॉग धीरे धीरे लोगों की पहली पसंद बन रहा है। यह नस्ल भारतीय मौसम के हिसाब से पूरी तरह फिट होती है और इसकी इम्युनिटी भी मजबूत होती है। सबसे अच्छी बात यह है कि इसका मेंटेनेंस खर्च बेहद कम होता है और यह बेहद वफादार भी होता है। कई एनजीओ और शेल्टर इन्हें फ्री या बेहद कम कीमत में दे देते हैं।
इन बातों का रखें ध्यान
कुत्ता पालने के साथ अब सरकार और नगर निगम भी नियम सख्त कर रहे हैं। कई शहरों में पेट डॉग का रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस जरूरी कर दिया गया है। बिना रजिस्ट्रेशन कुत्ता पालने पर जुर्माना लगाया जा सकता है। सार्वजनिक जगहों पर कुत्ते को बिना पट्टा घुमाना नियमों के खिलाफ है और कुछ नस्लों के लिए मुंह पर कवर लगाना भी जरूरी है।
कुछ राज्यों और नगर निगमों ने आक्रामक यानी अटैक करने वाली नस्लों पर नई खरीद पर रोक भी लगाई है। ऐसे में पिटबुल या रॉटवीलर जैसी नस्ल लेने से पहले स्थानीय नियमों की जानकारी लेना बेहद जरूरी हो गया है। पिटबुल जैसे कुत्तों को पालना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में खरीदने से पहले सुरक्षा के हर पहलु पर ध्यान दें।
