जानवरों को पालना एक जिम्मेदारी का काम है। जानवरों को भी भारतीय संविधान में मानवों की तरह ही कुछ अधिकार दिए गए हैं। भारतीय संविधान का अनुच्छेद 51A(G) में बताया गया है कि हर भारतीय नागरिक का कर्तव्य है कि जीवित प्राणी के प्रति दया और करुणा रखे। जानवरों को पालने और उनके प्रजनन से लेकर खरीदने-बेचने तक नियम बनाए गए हैं। अगर आप किसी जानवर को पाल रहे हैं तो आपको उस जानवर को पालने से संबंधित नियम और दिशा निर्देश भी पता होने चाहिए।

 

भारत में ज्यादातर लोग कुत्ते को पालना पसंद करते हैं। कुत्तों को खरीदना-बेचना करोड़ों का बिजनेस बन चुका है। इसमें कई लोग शामिल हैं जो कुत्तों की ब्रिडिंग से लेकर उनकी बेचने तक अलग-अलग भूमिका निभाते हैं। यह नया बिजनेस है जो विदेशी नस्लों के कुत्तों की बढ़ती मांग के साथ बढ़ता जा रहा है। बढ़ते मुनाफे के साथ कुत्तों के साथ क्रूरता भी बढ़ती जा रही है। लोग मुनाफे के लिए कुत्तों की असुरक्षित ब्रीडिंग करवाते हैं और बिना नियमों का पालन किए उनका बिजनेस करते हैं।

 

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कुत्तों की खरीद-बिक्री से जुड़े कानून

 

सालों तक कुत्तों के साथ बढ़ती क्रूरता का मुद्दा उठता रहा है। पशु कल्याण संगठनों ने कई सालों तक कुत्तों के साथ क्रूरता के खिलाफ अभियान चलाया था। इसके बाद सरकार ने बिजनेस के लिए कुत्तों के प्रजनन से जुड़े पशु क्रूरता के मु्द्दों से निपटने के लिए कदम उठाया और 2017 में एक नया कानून बनाया। केंद्र सरकार ने पशुओं के अवैध प्रजनन को रोकने और पालतू पशुओं की बिक्री या व्यापार को पारदर्शी बनाने के लिए पशु क्रूरता निवारण (कु्त्ते प्रजनन और मार्केटिंग) नियम, 2017 और पशु क्रूरता निवारण (पालतू जानवरों की दुकान) नियम, 2018 को भी लागू किया है।

 

 इसके अलावा पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 की धारा 9 (k) के तहत भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) को अधिकार दिए गए हैं कि वह सुनिश्चित करे की पशुओं के साथ क्रूरता ना हो। AWBI समय-समय पर जानवरों के साथ क्रूरता को रोकने के लिए दिशा निर्देश जारी करता रहता है।

इन नियमों को जरूर जानें

  • अगर कोई भी व्यक्ति कुत्तों का प्रजनन करवाता है तो उसके पास रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट होना चाहिए। बिना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के कोई भी व्यक्ति कुत्तों का प्रजनन करवाना गैर कानूनी है। राज्य पशु कल्याण बोर्ड पहले निरीक्षण करता है और उसके बाद सर्टिफिकेट जारी करता है। हर दो साल में सर्टिफिकेट रिन्यू किया जाता है। इसका उद्देश्य कॉमर्शियल प्रजनन केंद्रों पर पशु क्रूरता के मामलों पर रोक लगाना है।

  • अगर किसी व्यक्ति को पशु क्रूरता निवारण अधिनियम या वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया है, वे कुत्तों के प्रजनन के लिए रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं मिलेगा।

  • इसके अलावा जिन लोगों को प्रजनन के लिए सर्टिफिकेट मिला हुआ है, उन्हें भी नियमों का पालन करना होगा। राज्य पशु कल्याण बोर्ड को अधिकार है कि वे किसी भी ब्रीडिंग सेंटर पर छापा मार सकते हैं। अगर किसी कुत्ते को अनुचित तरीके से बिक्री के लिए रखा गया है तो उस सेंटर की मान्यता रद्द की जा सकती है। इसके साथ ही सेंटर के मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।

  • नए नियमों के अनुसार, 8 हफ्तों यानी 2 महीने से कम उम्र के पिल्लों को बेचा नहीं जा सकता। इस तरह की कई शिकायतें सामने आई थीं, जिनमें पिल्लों को कम उम्र में ही मां से अलग कर दिया जाता था।

  • इसके साथ ही ब्रीडिंग सेंटर्स में पिल्लों के स्वास्थ्य का ध्यान नहीं रखा जाता था। इन सेंटर्स पर पले कु्त्तों में अक्सर गंभीर बीमारी, कमजोरी के लक्ष्ण दिखाई देते थे। आमतौर पर पिल्ले अस्वस्थ होते हैं जिस कारण बड़ी संख्या में मौतें होती हैं।

  • कुत्तों को 8 हफ्तों से पहले नहीं बेचा जा सकता और अगर आप किसी पिल्ले को खरीदने के लिए किसी ब्रीडिंग सेंटर पर जा रहे हैं तो आपको पिल्ले के साथ-साथ उसका वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट भी लेना चाहिए। कुत्ते को बेचने से पहले ब्रीडिंग सेंटर की जिम्मेदारी है कि वह उसका शुरुआती टीकाकरण करवाए और उसका रिकॉर्ड रखे।

  • कई लोग बिना सोचे समझे कुत्ते को खरीद लेते हैं और बाद में जब उनसे कुत्ता संभलता नहीं है तो वे उसे आवारा छोड़ देते हैं। नियमों के तहत अगर कोई बिक्री केंद्र कु्त्तों को बेच रहा है तो उसके लिए उन्हें किसी सार्वजनिक जगह पर प्रदर्शनी लगाने की अनुमति नहीं है। बिक्री से पहले उन्हें खरीदने वाले को कुत्ते की देखभाल और स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरी सलाह देनी होगी ताकि वे कुत्ते की उचित देखभाल कर सकें।

  • नियमों के अनुसार, ब्रीडिंग सेंटर को प्रजनन करने वाले कुत्तों का रिकॉर्ड रखना होगा। कई मामलों में सामने आ चुका है कि मुनाफे के लिए कुत्ते से साल में कई बार आमतौर पर दो बार प्रजनन करवाया जाता है और यह सालों तक चलता है। विदेशी नस्ल के कुत्तों के साथ इस तरह की क्रूरता के ज्यादा मामले सामने आते हैं।

  • नियमों के अनुसार, ब्रीडिंग के लिए अगर कोई कुत्ता तैयार नहीं है या योग्य नहीं है तो उसे भी उसी तरह रखा जाएगा जिस तरह अन्य कुत्तों को रखा जा रहा है। आमतौर पर देखा जाता है कि जो कु्त्ते प्रजनन के मानकों पर खड़े नहीं उतरते उन्हें आवारा छोड़ दिया जाता है लेकिन 2017 में बनाए गए नियमों के मुताबिक अब ऐसा नहीं होगा।

  • अगर किसी ब्रीडिंग सेंटर पर कोई पिल्ला 6 महीने तक बिना बिक्री के रह जाता है तो उसको किसी दूसरी जगह शिफ्ट किया जाएगा और इसके लिए पशु कल्याण संगठनों की मदद ली जाएगी। ब्रीडिंग सेंटर को अपनी देखरेख में पैदा हुए या मरने वाले सभी कुत्तों का रिकॉर्ड रखना होगा। अगर किसी कुत्ते की मौत हो जाती है तो डॉक्टर से इसकी पुष्टि के बाद कारण भी रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा।

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कुत्ते को खरीदते समय रखें ध्यान

अगर आप किसी कुत्ते को खरीदने का प्लान बना रहे हैं तो उससे पहले कुछ जरूरी चीजों की जांच कर लें। सबसे पहले तो आप किसी नस्ल का कु्त्ता खरीदना चाहते हैं इस बात को सपष्ट कर लें। कु्त्ता पालने के लिए जरूरी संसाधन आपके पास होने चाहिए। इसके साथ ही जब आप कुत्ता खरीदने के लिए किसी दुकान या ब्रीडिंग सेंटर का चयन करते हैं तो उसका रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जरूर चेक कर लें।

 

इसके साथ ही यह सुनिश्चित कर लें की कुत्ते की उम्र कम से कम 8 हफ्ते हो और उसे शुरुआती टीके लगे हों। टीकाकरण का सर्टिफिकेट भी कुत्ते के साथ ही लें। टीकाकरण रिकॉर्ड के साथ-साथ माइक्रोचिप के कागजात और हेल्थ सर्टिफिकेट भी लें। अगर आपके स्थानीय प्रशासन ने कुत्तों को पालने के संबंध में कोई नियम बनाएं हैं तो एक बार उन्हें भी पढ़ लें। इसके बाद ही कुत्ता खरीदें ताकि भविष्य में आपको किसी प्रकार की कोई परेशानी ना हो।