टी20 वर्ल्ड कप खिताब को डिफेंड करने के बाद यूनाइटेड किंगडम (UK) दौरे पर गई भारतीय टीम एक अदद जीत के लिए तरस गई है। बेलफास्ट में उसे आयरलैंड के हाथों 0-2 से शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा था। आयरलैंड के खिलाफ टीम इंडिया की बल्लेबाजी बुरी तरह से फ्लॉप रही थी। इसके बाद इंग्लैंड के सामने 5 मैचों की टी20 सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम 8 ओवर में 2 विकेट के नुकसान पर 87 रन बनाने के बावजूद निर्धारित 20 ओवर में 189/7 के स्कोर तक ही पहुंच सकी।
सलामी बल्लेबाज अभिषेक शर्मा (24 गेंद में 59 रन) के आउट होने के बाद क्रीज पर उतरे उप-कप्तान तिलक वर्मा 13 गेंद खेलकर महज 13 रन पाए, जिससे मोमेंटम इंग्लिश टीम की ओर शिफ्ट हो गया। शिवम दुबे (21 गेंद में नाबाद 42 रन) ने तगड़ी फिनिश दी लेकिन फिर भी टीम इंडिया को 180 का स्कोर पार करने में पसीने छूट गए। अच्छा हुआ कि बारिश आ गई, नहीं तो चेस्टर ली स्ट्रीट के रिवरसाइड ग्राउंड में ये रन कम पड़ सकते थे।
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हर बार फंस रहे तिलक
आयरलैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में 183 रन के चेज में तिलक 21 गेंद में सिर्फ 19 रन ही बना पाए। वह उस समय क्रीज पर उतरे, जब भारत का स्कोर 5.1 ओवर में 60/3 था। तिलक 11वें ओवर की दूसरी गेंद पर 90 के स्कोर पर पांचवें विकेट के रूप में आउट हुए। उन्होंने क्रीज पर पूरा समय बिताया लेकिन जब टीम को उनकी सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वह चलते बने। टीम इंडिया यह मुकाबला 34 रन से हारी।
सीरीज के दूसरे और आखिरी टी20 मुकाबले में आयरलैंड ने भारत को 155 रन का टारगेट दिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत ने पावरप्ले में 4 विकेट खो दिए। तिलक ने पारी को संभालने की जिम्मेदारी उठाई और 45 गेंद में अपना अर्धशतक पूरा किया। हालांकि अभी उनका काम पूरा नहीं हुआ था और उन्हें अंत तक खड़े रहना जरूरी था लेकिन वह अगली ही गेंद पर आउट हो गए। वह 46 गेंद में 119.56 के स्ट्राइक रेट से 55 रन बनाकर पवेलियन लौटे, जिसमें 3 चौके और 1 छक्का शामिल रहा।
तिलक जब आउट हुए उस समय भारत को सीरीज हार से बचने के लिए 16 गेंद में 38 रन चाहिए थे। हर्षित राणा ने 10 गेंद में 21 रन ठोककर टीम को लक्ष्य के करीब पहुंचाया लेकिन वह हार नहीं टाल सके। भारत की हार का ठीकरा तिलक पर फोड़ा गया। आलोचकों का मानना था कि अगर उन्होंने मिडिल ओवर्स में तेजी से रन बनाए होते तो डेथ ओवर्स के लिए इतने रन नहीं बचते, जो लोअर ऑर्डर के लिए नामुमकिन साबित नहीं होता।
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तिलक को रास नहीं आ रहा लीडरशिप रोल
23 साल के तिलक को UK दौरे से पहले टी20 टीम का उप-कप्तान बनाया गया था। ऐसा लग रहा है कि लीडरशिप रोल उन पर अतिरिक्त बोझ बन गया है, जिससे वह खुलकर नहीं खेल पा रहे हैं। तिलक उप-कप्तान बनने के बाद 3 पारियों में 108.75 के बेहद खराब स्ट्राइक रेट से 87 रन ही बना पाए हैं। UK दौरे से ठीक पहले उन्हें श्रीलंका में आयोजित हुई वनडे ट्राई सीरीज के लिए इंडिया-ए की कप्तानी दी गई थी।
इंडिया-ए ने फाइनल में श्रीलंका को हराकर खिताब जीता लेकिन पूरी ट्राई सीरीज में धीमी बैटिंग के चलते तिलक को आलोचना झेलनी पड़ी। वह इंडिया-ए की ओर से सबसे ज्यादा रन (275) बनाने वाले बल्लेबाज रहे। मगर उनका स्ट्राइक रेट सिर्फ 74.93 का रहा। तिलक ने फाइनल में 90 गेंद में 67 रन बनाए थे। गौर करने वाली बात है कि वैभव सूर्यवंशी और प्रियांश आर्य की तूफानी बल्लेबाजी से इंडिया-ए ने 9.5 ओवर में 136 रन बना लिए थे, तब तिलक की क्रीज पर एंट्री हुई थी। इसके बावजूद वह 100 के स्ट्राइक रेट से भी नहीं खेल सके।
पंत की तरह तिलक के भी कटेंगे पर?
विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत से हाल ही में भारतीय टेस्ट टीम की उप-कप्तानी छीन ली गई थी। अफगानिस्तान के खिलाफ इकलौते टेस्ट के लिए टीम चुनने के बाद चीफ सेलेक्टर अजीत अगरकर ने पंत के डिमोशन की वजह बताई। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि पंत बिना किसी अतिरिक्त दबाव के खुलकर खेल सकें। मुल्लांपुर में हुए उस इकलौते टेस्ट मैच से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में हेड कोच गौतम गंभीर ने भी यही बात दोहराई। अब देखना होगा कि तिलक, जो लीडरशिप रोल के दबाव में अपना स्वभाविक गेम नहीं खेल पा रहे हैं, उन पर ऐक्शन लिया जाता या नहीं।


