भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर अपनी निजी कामयाबी का ढिंढोरा पीटने वाले खिलाड़ियों को हमेशा से आड़े हाथ लेते रहे हैं। अब T20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद उन्होंने फिर से कहा है कि जब तक वह हैं तब तक निजी उपलब्धियों के बारे में बात नहीं की जाएगी। अपनी बात एकदम साफ-साफ कह देने की वजह से कई बार आलोचना झेलने वाले गंभीर का कहना है कि जो 30 लोग ड्रेसिंग रूम में होते हैं, उन्हीं के प्रति वह जवाबदेह हैं। लगातार दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के कोच गौतम गंभीर ने कहा है कि उपलब्धियों के बजाय ट्रॉफी का जश्न मनाना चाहिए।
न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर जब भारत ने अपना तीसरा टी20 विश्व कप खिताब जीता तो टीम के सभी खिलाड़ियों ने इसे टीम का संयुक्त प्रयास बताया। हीरो कल्चर का विरोध करने वाले गौतम गंभीर ने साफ कहा कि टीम गेम का मकसद ट्रॉफी जीतना है, पर्सनल रन बनाना नहीं। उन्होंने कप्तान सूर्य कुमार यादव की भी तारीफ की है कि इस बारे में उनकी और सूर्या की राय एक जैसी है।
टीम गेम चाहते हैं गंभीर
गौतम गंभीर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि सूर्या के साथ मेरी बातचीत हमेशा से यही रही है कि उपलब्धियां मायने नहीं रखती। ट्रॉफी मायने रखती हैं। भारतीय क्रिकेट में बहुत लंबे समय से हम उपलब्धियों के बारे में बात करते आ रहे हैं और मुझे उम्मीद है कि जब तक मैं हूं हम उपलब्धियों के बारे में बात नहीं करेंगे। उपलब्धियों का जश्न मनाना बंद करो, ट्रॉफी का जश्न मनाओ। यह महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम खेल का बड़ा उद्देश्य ट्रॉफी जीतना है, ना कि व्यक्तिगत रन बनाना। यह मेरे लिए कभी मायने नहीं रखता था और ना ही कभी रखेगा।’
यह भी पढ़ें: 'कोच साहब, हंस लिया करो...'. वर्ल्ड जीतने पर धोनी ने गंभीर के लिए लिखा मैसेज
गंभीर ने आगे कहा, ‘मैं बहुत खुशकिस्मत रहा हूं कि सूर्या और मेरी राय एक ही है, विशेषकर इस मामले में।’ भले ही गौतम गंभीर ने किसी का नाम नहीं लिया लेकिन इसे 2011 वर्ल्ड कप फाइनल मैच में धोनी के प्रदर्शन से जोड़कर देखा जा रहा है। उस फाइनल मैच में गंभीर ने 97 रन बनाए थे लेकिन आखिरी छक्का महेंद्र सिंह धोनी ने लगाया। इसको लेकर कई बार गंभीर खुले तौर पर कह चुके हैं कि एक छक्का मैच नहीं जितवाता है।
जमकर की संजू सैमसन की तारीफ
संजू सैमसन की तारीफ करते हुए गौतम गंभीर ने बताया है कि यह टीम गेम का सबसे शानदार उदाहरण है। उन्होंने कहा है, 'आप पिछले तीन मैच में देख सकते हैं कि संजू ने क्या किया। नाबाद 97, 89 और 89। सोचिए अगर आप किसी उपलब्धि के लिए खेल रहे होते तो शायद हम 250 रन तक नहीं पहुंच पाते इसलिए मुझे लगता है कि यह आप लोगों के लिए भी है।’
यह भी पढ़ें: भारत की जीत का गुमनाम हीरो, जिसने चुपचाप गंभीर-सूर्या का सपना पूरा कर दिया!
पिछले दो साल में यह देखा गया है कि भारत की जीत के लिए उनकी कम तारीफ हुई और नाकामियों के लिए लगभग हर बार उनकी बुराई हुई। सोशल मीडिया पर आलोचनाओं ने भी उनकी राह मुश्किल की लेकिन गंभीर को उन लोगों की राय की परवाह नहीं है जो बाहर से देख रहे हैं। इस पर गंभीर ने कहा है, ‘मेरी जवाबदेही किसी सोशल मीडिया के प्रति नहीं है। मेरी जवाबदेही अधिकतर उन 30 लोगों के प्रति है जो ड्रेसिंग रूम में बैठे हैं भले ही मैं एक कोच के तौर पर दो आईसीसी ट्रॉफी जीत चुका हूं लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि भविष्य में मुझे लगता है कि मेरे कोचिंग कार्यकाल में वे 30 लोग मेरे लिए सबसे अधिक मायने रखते हैं, कोई और मायने नहीं रखता।’
