केंद्र सरकार ने चंडीगढ़ में पांच नए कानून लागू किए हैं जिनसे किराए पर दिए जाने वाले घरों, ट्रैवल एजेंसी, स्टैंप ड्यूटी और जमीन के अधिकार से जुड़े कई नियम बदल जाएंगे। 3 राज्यों से लिए गए ये 5 कानून मौजूदा समय के हिसाब से जरूरी बताए गए हैं। चंडीगढ़ के चीफ सेक्रेटरी एच राजेश प्रसाद ने इन कानूनों की जानकारी देते हुए बताया है कि ये कई पुराने और ढीले कानूनों की जगह ले रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया है कि भले ही इन कानूनों को अलग-अलग राज्यों से लिया गया है लेकिन चंडीगढ़ की जरूरत के हिसाब से उनमें कुछ बदलाव किए गए हैं। नए नियमों के मुताबिक, अब किराएदार और मकान मालिक के एग्रीमेंट का एक रजिस्ट्रेशन कराना होगा, ट्रैवल एजेंसी चलाने वालों को रजिस्ट्रेशन कराना होगा और चंडीगढ़ के गांवों के लोगों को भी अब उनकी जमीन के अधिकार मिल सकेंगे और उन्हें कॉमन खसरा से काम नहीं चलाना पड़ेगा।

 

पांच में से तीन कानून पंजाब से और एक-एक कानून असम और हरियाणा से लिए गए हैं। केंद्र सरकार की ओर से 6 मई को जारी अधिसूचना के अनुसार, ये कानून पारदर्शिता बढ़ना, लीगल फ्रेमवर्क को आधुनिक करने और लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए लागू किए गए हैं। यह अधिसूचना पंजाब रिऑर्गनाइजेशन ऐक्ट, 1966 के तहत लागू की गई है। इसकी वजह है कि चंडीगढ़ की अपनी कोई विधानसभा नहीं है और वह केंद्र शासित है तो यहां केंद्र सरकार ही कानून लागू करती है।


5 कानूनों से चंडीगढ़ में क्या बदलेगा?

मिलेगा जमीन का अधिकार

पंजाब में लागू इस कानून की तर्ज पर चंडीगढ़ में लागू किए गए कानून का मुख्य मकसद चंडीगढ़ के कुछ ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को जमीन के अधिकार देना है। इसके तहत जमीनों के सर्वे किए जा सकेंगे और अब तक जो लोग औपचारिक तौर पर जमीन के मालिक नहीं हैं, उन्हें जमीन का अधिकार मिल सकेगा। इसका मकसद है कि जमीन के विवादों को कम किया जा सके और लोगों को स्पष्टता रहे कि कौन सी जमीन किसकी है। 

 

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इसके बारे में चीफ सेक्रेटरी एच राजेश प्रसाद ने बताया, 'चंडीगढ़ के ग्रामीण इलाकों में कॉमन खसरा नंबर हैं यानी एक ही खसरा नंबर पर कई लोगों की जमीन दर्ज है। किसी भी व्यक्ति का अलग से खसरा नंबर नहीं है। कभी जमीन पर विवाद की स्थिति हो, किसी को लोन लेना हो या फिर कोई अन्य काम हो, तब दिक्कत आती है। इसके लिए हम पंजाब के कानून में थोड़ा सा बदलाव करके इसे लागू कर रहे हैं। इससे लोगों को अपनी जमीन का हक मिलेगा, बिल्डिंग प्लान अप्रूव हो सकेंगे और सर्वे करने और योजना बनाने में भी मदद मिलेगी।'

किराएदारों का झगड़ा कम करने की तैयारी

इसे चंडीगढ़ में रेंट कंट्रोल ऐक्ट कहा जा रहा है। पहले इसकी जगह पर ईस्ट पंजाब अर्बन रेंट रेस्ट्रिक्शन ऐक्ट, 1949 लागू था। चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि पुराने कानून में कई खामियां थीं, इसलिए नए कानून को लागू किया जा रहा है। नए कानून से उम्मीद है कि किराएदारों और मकान मालिकों के झगड़ों में कमी आएगी। उनका कहना है कि इस कानून में किराएदारों और मकान मालिकों दोनों का फायदा होगा और विवाद की स्थिति में फैसले लेने में भी आसानी होगी।

 

नए कानून के मुताबिक, जब भी कोई किराएदार कोई भी घर, दुकान या अन्य संपत्ति किराए पर लेगा तो किराएदार और मालिक को ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस रजिस्ट्रेशन के समय तय हुई शर्तें ही विवाद की स्थिति में मान्य होंगी। नए नियमों के मुताबिक अगर कोई विवाद होगा तो 60 दिन में उसका निपटारा होगा और 3 से ज्यादा अडजर्नमेंट नहीं दिए जाएंगे। इसमें किराएदार और मकान मालिक दोनों का फायदा होगा। इससे हाउसिंग सेक्टर में ज्यादा निवेश आएगा और लोग किराए पर घर भी आसान से दे पाएंगे। 

 

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साथ ही, किराया बढ़ाने के नियम तय करने के लिए रेंट कंट्रोल अथॉरिटी बनाई जाएगी। यही अथॉरिटी किराए से जुड़े विवाद भी निपटाएगी।

 

5 साल चलेगा Fire NOC

चीफ सेक्रेटरी एच राजेश प्रसाद ने बताया कि फायर सेफ्टी से जुड़े पुराने नियमों और पुराने समय के हिसाब से बनाई गई शर्तों के हिसाब से काम करने में समस्या आती है इसीलिए हरियाणा में पहले से लागू इस कानून को अपनाया जा रहा है। नए नियमों के तहत, फायर NOC के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन होगा और एक बार मिला NOC पांच साल तक लागू रहेगी। उनका कहना है कि इससे कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय बचेगा और पारदर्शिता आएगी।

 

नए नियमों से कारोबारियों और अन्य संस्थाओं का काम भी आसान होने की उम्मीद जताई गई है।

विदेश भेजने के नाम पर ठगी पर लगाम

चीफ सेक्रेटरी ने बताया कि पंजाब में सख्त नियम होने और चंडीगढ़ में पुराने नियमों के चलते ट्रैवल एजेंसी के नाम पर गड़बड़ी करने वाले लोग लूपहोल का फायदा उठाते हैं। उन्होंने कहा, 'ट्रैवल एजेंट आदि लोगों को गुमराह करते हैं और इमिग्रेशन का स्कैंडल करते हैं। पंजाब के लोग चंडीगढ़ में यह काम करने लगे थे क्योंकि यहां सख्त कानून नहीं था। अब ट्रैवल एजेंट को रजिस्ट्रेशन करना होगा और उल्लंघन करने पर केस चलेगा और 3 से 7 साल तक की सजा होगी। एजेंसियों को छापेमारी करने, ऐक्शन लेने और संपत्ति जब्त करने का अधिकार होगा।' 

 

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यह नियम बेहद जरूरी माना जा रहा है क्योंकि पंजाब और हरियाणा के कई लोगों को विदेश भेजने के नाम पर ठगी के मामले भी सामने आए हैं। यही वजह है कि अब ट्रैवल एजेंट्स का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य करने के साथ-साथ उनके खिलाफ कार्रवाई करने के नियम भी तय कर दिए गए हैं।

स्टैंप ड्यूटी बचाने वालों पर कसी जाएगी नकेल

बताया गया है कि कई बार जमीन की रजिस्ट्री कराते समय अंडर वैल्युएशन का खेल चलता है। इसमें जमीन की कीमत कम बताकर स्टैंप ड्यूटी बचाई जाती है। अब इंडियन स्टैंप (पंजाब अमेंडमेंट) ऐक्ट, 2001 और 2003 के नियमों के तहत अंडर वैल्युएशन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। रजिस्ट्रार को अगर अंडर वैल्युएशन की जानकारी मिलती है तो वे इसकी जानकारी स्टैंप कलेक्टर को देंगे। नियमों के मुताबिक, जितने की स्टैंप ड्यूटी कम बताई गई होगी उतनी राशि पर 12 पर्सेंट ब्याज लगेगा। अगर किसी ने जानबूझकर ड्यूटी बचाने की कोशिश की तो उस पर 3 पर्सेंट का जुर्माना भी लगाया जाएगा।