तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों के नतीजे आए 4 दिन बीत गए हैं लेकिन यह तय नहीं हो पाया है कि सरकार कौन बनाएगा। राज्य में 108 सीटों के साथ सबसे ज्यादा संख्या बल, तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के पास है। कांग्रेस ने अपने 5 विधायकों के साथ समर्थन देने का वादा किया है लेकिन बहुत के आंकड़े से अभी विजय काफी दूर हैं।
तमिलनाडु में कुल 234 विधानसभा सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 118 सीटें चाहिए। TVK के पास कुल 108 विधायक हैं, जिनमें से एक स्पीकर की सीट होगी, दो सीटों से खुद विजय विधायक हैं, ऐसे में एक सीट छोड़नी होगी। सदन में बहुमत साबित करने के लिए कुल 118 विधायक चाहिए, कांग्रेस के समर्थन के बाद भी 5 से ज्यादा विधायकों की जरूरत है। यह संख्या बल अभी विजय के पास नहीं है।
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CPI देगी TVK का साथ?
CPI के दोनों धड़े अभी मंथन कर रहे हैं कि विजय को समर्थन देना है या नहीं देना है। CPI(M) शुक्रवार को फैसला करेगी कि वह TVK को सरकार बनाने में समर्थन देगी या नहीं। TVK ने कांग्रेस के साथ पोस्ट-पोल गठबंधन किया है और अब अन्य सहयोगी दलों से सरकार बनाने के लिए समर्थन मांग रही है।
TVK की किस शर्त पर बन सकती है बात?
TVK ने कहा है कि जो भी पार्टी उसके साथ आएगी, उसे सरकार में हिस्सेदारी दी जाएगी। CPI(M) के तमिलनाडु राज्य सचिव पी शनमुगम ने पहले ही TVK नेता अभिनेता विजय से जल्दी मुख्यमंत्री पद संभालने की अपील की है। उन्होंने कहा कि TVK विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है और उसके 108 सीटें हैं।
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VCK साथ दे तो बन जाएगी बात?
पी शनमुगम ने राज्यपाल पर आरोप लगाया कि वह संविधान के खिलाफ काम कर रहे हैं और जानबूझकर विजय को सरकार बनाने का न्योता नहीं दे रहे हैं। दूसरी ओर, थोल थिरुमावलवन ने कहा कि VCK का फैसला वामपंथी दलों के फैसले के साथ रहेगा।
VCK के विधायक उच्चस्तरीय बैठक करेंगे, TVK को समर्थन देने पर अंतिम फैसला हो सकता है। VCK, DMK की पुरानी और भरोसेमंद सहयोगी रही है। इस चुनाव में उसे 2 सीटें मिली थीं। TVK अब DMK के सहयोगियों CPI(M) और VCK के समर्थन से सरकार बनाने की कोशिश कर रही है।
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कहीं राष्ट्रपति शासन न लग जाए
तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर बार-बार यह जोर दे रहे हैं कि TVK अध्यक्ष विजय को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि राज्य में स्थिर सरकार बने और संवैधानिक संकट न पैदा हो, जिससे राष्ट्रपति शासन लगने की नौबत न आए।
सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में साफ कहा गया है कि एक बार किसी दल या गठबंधन के पास बहुमत साबित हो जाए तो राज्यपाल को सरकार बनाने की अनुमति देनी ही चाहिए। सिर्फ एक ही स्थिति में राज्यपाल मना कर सकते हैं ,अगर उन्हें लगे कि दावा करने वाले लोग स्थिर सरकार नहीं चला पाएंगे। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि राज्यपाल को अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से भी संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है।