तमिलनाडु में विजय जोसेफ की नई नवेली पार्टी तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) को सबसे ज्यादा सीटें तो मिली हैं लेकिन वह बहुमत से दूर है। अब तक सत्ता में रही द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) और पूर्व में सत्ता में रही ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) के पास भी अकेले के दम पर इतनी सीटें नहीं हैं कि वे सरकार बना सके हैं। कांग्रेस ने TVK के साथ गठबंधन का एलान किया है लेकिन अभी भी विजय को 6 और विधायकों का साथ चाहिए। इस स्थिति में AIADMK और DMK यानी दो धुर विरोधियों के साथ आने की संभावनाओं ने तमिलनाडु की राजनीति में खलबली मचा दी है। कहा जा रहा है कि विजय को रोकने के लिए इन दोनों दलों के बीच भी बातचीत हुई है कि किस तरह से सरकार बनाई जा सकती है।
डीएमके के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ी कांग्रेस ने जब से TVK के साथ गठबंधन करने का एलान किया है, तब से ही स्थिति बदलती नजर आ रही है। AIADMK और DMK दोनों ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। इससे पहले, टीवीके प्रमुख विजय ने राज्यपाल से मुलाकात कर कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश किया। हालांकि, यह कहा जा रहा है कि विजय के पास 118 विधायकों की संख्या पूरी न होने के चलते अभी तक उन्हें शपथ ग्रहण का न्योता नहीं दिया गया है। यही वजह है कि अलग-अलग तरह की चर्चा हो रही है।
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क्या है तमिलनाडु का नंबर गेम?
अगर चुनाव से पहले के गठबंधन की बात करें तो डीएमके की अगुवाई वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस में कई दल शामिल थे। कांग्रेस और डीएमके के अलावा सीपीआई, सीपीआई और वीसीके प्रमुख हैं। इसमें से डीएमके को 59, कांग्रेस को 5, सीपीआई को 2, सीपीएम को 2 और वीसीके को दो सीट पर जीत मिली है। 2 सीटों पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग को भी जीत मिली है जो कांग्रेस की सहयोगी रही है। एक सीट जीतने वाली DMDK भी इसी गठबंधन का हिस्सा है। अब अगर इसमें से कांग्रेस को हटा दें तो कुल 68 विधायक होते हैं।
दूसरी तरफ, तीसरे नंबर पर रही AIADMK को कुल 47 सीटों पर जीत मिली है। उसके साथ, 4 विधायकों वाली पीएमके और एक विधायक वाली AMMK भी है। बीजेपी भी इसी गठबंधन का हिस्सा है और उसके एक उम्मीदवार को जीत मिली है। अगर इसकी संख्या जोड़ें तो कुल 54 तक पहुंच जाती है।
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अब अगर इन दोनों गठबंधनों को जोड़ दें तो कुल संख्या 122 तक पहुंचती है जो कि बहुमत के लिए पर्याप्त है। इस स्थिति में टीवीके सत्ता से दूर रह सकती है। हालांकि, एक ही गठबंधन में IUML, लेफ्ट और बीजेपी जैसे दलों का आना मुश्किल माना जा रहा है। लेफ्ट के दल पहले भी संकेत दे चुके हैं कि वे विजय के साथ जा सकते हैं। इस स्थिति में अगर डीएमके और एआईएडीएमके ही मिलकर सरकार बनाना चाहें तो उनके विधायकों की संख्या 106 ही है। इस स्थिति में उन्हें 12 और विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी और यहीं पर मामला बिगड़ सकता है।
AIADMK में होगी टूट?
बुधवार सुबह से ही एक चर्चा तेज है कि AIADMK के नेता विजय का समर्थन करना चाहते हैं। लीजा मार्टिन ने तो यह कह दिया था कि खुद पलानीस्वामी ही TVK नेताओं से बातचीत कर रहे हैं। इसके बाद खबरें आईं कि AIADMK के वरिष्ठ नेता शनमुगम 30 विधायकों के साथ टीवीके का समर्थन कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने यह कहा कि वह अकेले हैं। बाद में AIADMK की एक मीटिंग हुई और पार्टी की तरफ से आधिकारिक तौर पर यही कहा गया कि किसी भी स्थिति में TVK का समर्थन नहीं किया जाएगा।
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TVK के साथ ना जाने का एलान पार्टी की तरफ से किया गया है लेकिन कहा जा रहा है कि विधायकों की राय अलग है। यह भी आशंका है कि अगर AIDMK और DMK के साथ आने का फैसला होता है तो AIADMK में टूट हो सकती है। इसकी बड़ी वजह है कि तमिलनाडु में ये दोनों दल एक-दूसरे के धुर विरोधी हैं और दोनों के साथ आने की स्थिति में कई विधायक खुद को असहज स्थिति में पा सकते हैं। ऐसे में कई नेता पाला बदलने की तैयारी कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो विजय की राह आसान हो जाएगी वह सरकार बनाने में कामयाब हो जाएंगे।