भारतीय जनता पार्टी का विजय अभियान, साल 2014 के बाद से लगातार बढ़ता जा रहा है। अब 'अंग, बंग और कलिंग' में भी बीजेपी की सरकार है। अंग, बिहार को कहते हैं, बंग तो बंगाल है और कलिंग, अब ओडिशा है। बीजेपी का एक के बाद एक, उन राज्यो में विस्तार हो रहा है, जहां यह पार्टी कभी थी ही नहीं। पश्चिम बंगाल में एक-एक सीट के लिए तरसने वाली बीजेपी, अब सत्ता में आ गई। बीजेपी पूरी जोर-आजमाइश के बाद भी दक्षिण भारत में टिक नहीं पा रही है।
टीम नरेंद्र मोदी लगातार अपनी ताकत बढ़ा रही है। अभी पार्टी या उसके सहयोगी 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 22 में सत्ता में हैं। पूरे देश में BJP के विधायकों की संख्या 2013 के 773 से बढ़कर अब 1798 हो गई है। बीजेपी अब भी दक्षिण भारत का किला नहीं ध्वस्त कर पाई है।
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कर्नाटक से आगे नहीं बढ़ी बीजेपी
कर्नाटक में BJP पहले सरकार बना चुकी है। आंध्र प्रदेश में उसकी सहयोगी TDP सत्ता में है। पर तमिलनाडु, तेलंगाना और केरल में पार्टी को अभी बड़ा चुनावी सफलता नहीं मिली है। हाल के चुनावों में भी BJP को तमिलनाडु में सिर्फ एक सीट और केरल में तीन सीटें ही मिलीं। दक्षिण भारत में बीजेपी जड़ें मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है लेकिन कामयाबी नहीं मिल रही।
2016 का एजेंडा, 2026 में भी नहीं सफल हुआ
2016 से ही BJP ने दक्षिण और पूर्वी राज्यों में विस्तार की योजना बनाई थी। इसमें ओडिशा और पश्चिम बंगाल में उसे सफलता मिली है। अब वह 2028 में कर्नाटक वापस जीतने की उम्मीद कर रही है। पार्टी के नेता मानते हैं कि अभी भी नेतृत्व और कार्यकर्ता स्तर पर काफी काम बाकी है।
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दिक्कत क्या आ रही है?
दक्षिण के लोगों की भाषा, भावनाओं और स्थानीय मुद्दों से जुड़ने में BJP को दिक्कत हो रही है। तमिलनाडु में BJP ने AIADMK के साथ गठबंधन किया, लेकिन सिर्फ 2.97 फीसदी वोट मिले। वहां DMK के खिलाफ बड़ी नाराजगी थी, फिर भी लोगों ने नई पार्टी TVK को वोट देना पसंद किया, बीजेपी को नहीं।
BJP ने DMK पर हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया, लेकिन इस मुद्दे का ज्यादा असर नहीं पड़ा। केरल में BJP ने ईसाई समुदाय को अपने साथ लाने की कोशिश की। पार्टी को 11.43 फीसदी वोट मिले, जो अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है लेकिन ईसाई वोटर अभी भी कांग्रेस के साथ रहे। दक्षिण के लोग, बीजेपी से वह जुड़ाव नहीं महसूस कर पा रहे हैं, जैसे वे चाहते हैं।
सिर्फ दक्षिण का किला बन गया है बीजेपी के लिए अजेय
BJP के नेता कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह चाहते हैं कि पार्टी को सिर्फ उत्तर भारतीय या हिंदी वाली पार्टी का चेहरा न माना जाए। पार्टी पहले ही पश्चिम, पूर्व और पूर्वोत्तर में यह छवि बदल चुकी है। अब सिर्फ दक्षिण बचा है, जिसके किले इतने मजबूत हैं कि बीजेपी का कोई दांव नहीं चलता।