तमिलनाडु में पहली बार चुनाव लड़ने वाली तमिलागा वेट्री कझगम (TVK) सरकार बनाने के करीब है लेकिन सरकार बन नहीं पा रही है। 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी TVK के नेता विजय जोसेफ दो बार राज्यपाल से मुलाकात कर चुके हैं लेकिन अभी तक उन्हें सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया गया है। इसकी बड़ी वजह है कि उनके पास सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 विधायक नहीं हो रहे हैं। सीटों की कमी से जूझ रही TVK के चुनावी प्रदर्शन पर नजर डालें तो समझ आता है कि अगर कुछ हजार वोट उसे और मिल गए होते तो विजय की पार्टी अकेले सरकार बना लेती।
पहली बार चुनाव में उतरी TVK के मुखिया विजय जोसेफ दो-दो सीटों से चुनाव लड़े और दोनों ही सीटों से उन्हें जीत मिली है। उनकी पार्टी के कई नेता द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) और ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIDMK) को हराने में कामयाब रहे। वहीं, एक दर्जन से ज्यादा सीटें ऐसी थीं जिन पर TVK के उम्मीदवार मामूली अंतर से हार गए। अब यही मामूली अंतर TVK पर भारी पड़ रहा है और तमाम कोशिशों के बावजूद वह 118 के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पा रही है। आइए विस्तार से समझते हैं कि TVK नंबर गेम में कहां पीछे छूट गई।
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मामूली अंतर से 10 सीटें हार गई TVK
अगर चुनाव परिणाम के आंकड़े देखें तो TVK को 10 सीटों पर बेहद मामूली अंतर से हार मिली है। कहीं हार और जीत का अतंर सिर्फ 285 वोटों का है तो कहीं 579 वोटों से हार मिली है। कुल 12 सीटें ऐसी हैं जिन पर हार और जीत का अंतर 2 हजार वोटों से भी कम है। वहीं, कुल 10 और सीटें ऐसी हैं जहां हार और जीत का अंतर 3 हजार वोटों से भी कम है। हालांकि, कई सीटों पर मामूली अंतर से ही TVK को भी जीत मिली है। एक सीट पर तो TVK को सिर्फ 1 ही वोट से जीत मिली है।
तिरुक्कोयिलूर विधानसभा सीट पर लगातार दो बार डीएमके जीत रही थी। इस बार वह तीसरे नंबर पर रही और AIADMK एस पलानीस्वामी ने सिर्फ 285 वोटों के अंतर से टीवीके के बी बालाजी को हरा दिया। ऐसा ही कुछ कुलितलाई सीट पर देखने को मिला। लगातार दो बार यह सीट जीत चुके डीएमके ने नजदीकी मुकाबले में यहां जीत हासिल कर ली। डीएमके के एस ए चंद्न ने टीवीके के जी बालासुब्रमणि को सिर्फ 579 वोटों से हरा दिया।
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इसी तरह टीवीके को पलानी सीट पर 693, कोविलपट्टी सीट पर 843, विक्रावंडी सीट पर 910, उदगमंगलम में 976, पापनासम सीट पर 1065, डिंडीगुल में 1131, किलियूर में 1311 और तिरुमायम में 1492 वोटों से हार का सामना करना पड़ा। इन 10 सीटों पर हार-जीत के अंतर को जोड़ें तो 7974 बनता है। अगर टीवीके को इतने वोट इन सीटों पर और मिल जाते तो वह सरकार बनाने की स्थिति में होती। इन 10 सीटों के अलावा पुडुकोट्टई सीट पर टीवीके को 1867 और करूर में 1821 वोटों के अंतर से हार मिली है।

2 से 3 हजार के बीच का अंतर
10 विधानसभा सीटें ऐसी भी हैं जहां जीत और हार का अंतर 2 से 3 हजार वोटों के बीच का है। यरकाड में 2189, कोयंबटूर साउथ में 2271, किलवेलूर में 2278, वृद्धाचलम में 2387, तिरुवन्नामलाई में 2455, तिट्टाकुडी में 2629, वनियंबडी में 2982, मेलूर में 27124, लालगुडी में 2739 और कोलाचल में टीवीके की हार का अंतर सिर्फ 2833 वोटों का है।
बता दें कि इस तरह कुल 22 सीटें ऐसी हैं जहां अगर टीवीके को मामूली अंतर से हार ना मिलती तो वह बंपर बहुमत के साथ सरकार बनाने की स्थिति में होती और उसे किसी भी दूसरे दल से गठबंधन की जरूत ही नहीं पड़ती।
NOTA ने भी बिगाड़ा खेल
टीवीके ने सबसे कम अंतर से जो सीट हारी है वह है तिरुक्कोयिलूर। इस सीट पर उसे 385 वोटों से हार मिली और NOTA को कुल 500 वोट मिले। कुलितिलाई में टीवीके को 579 वोटों से हार मिली है और इस सीट पर NOTA पर 612 वोट पड़े हैं। पलानी में हार का अंतर 693 है और NOTA पर 750 वोट पड़े हैं।