समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश ने 2027 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने आई-पैक से नाता तोड़ लिया है। आई-पैक से संबंध तोड़ने के पीछे अखिलेश यादव ने धन की कमी का हवाला दिया। बता दें कि पश्चिम बंगाल चुनाव के वक्त आई-पैक खूब चर्चा में रही है। मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आई-पैक के को-फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार भी किया गया था।
आई-पैक से संबंध तोड़ने पर अखिलेश यादव ने कहा, हां, 'हमारा संबंध था। हमारे साथ कुछ महीने उन्होंने काम किया। लेकिन उसके बाद हम काम नहीं कर पा रहे हैं, क्योंकि हमारे पास इतना धन नहीं है।'
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अखिलेश यादव ने कटाक्ष भरे अंदाज में कहा, 'हमने सोचा है कि जब जीतने वाली एजेंसी ही करना है तो बड़ी-बड़ी कंपनियां है। कुछ लोगों ने बताया कि कहां आप इन कंपनियों से काम करवा रहे हो। आप सी-वोटर से सर्वे करवाइए। ईवीएम कंपनी को साथ रखिए। उससे आप बात करिए। अगर सोशल मीडिया पर किसी के खिलाफ नकारात्मक प्रचार करना है तो 360 डिग्री करके कोई कंपनी है, उससे जुड़िए, मिलिए और फंडिंग करिए।'
क्या है आई-पैक?
बता दें कि आई-पैक चुनाव रणनीति बनाने वाली संस्था है। इसकी स्थापना प्रशांत किशोर ने की थी। यह कंपनी देशभर में कई चुनावों का प्रबंधन कर चुकी है। हाल ही में बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की चुनावी रणनीति आई-पैक ने ही तैयार की थी।
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प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इसी साल अप्रैल में आई-पैक के को-फाउंडर विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया था। उन पर पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाले से जुड़े होने का आरोप है। हालांकि विनेश को अदालत जमानत मिल चुकी है।
टीएमसी को मिली करारी हार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रचंड जीत हासिल की है। ममता बनर्जी की टीएमसी 80 सीटों पर सिमट गई। वहीं 207 विधानसभा क्षेत्रों में कमल खिला है। कांग्रेस ने दो और एक सीट पर सीपीएम ने जीत हासिल की है। ममता बनर्जी 2011 से बंगाल की सत्ता पर काबिज थी। पिछले चुनाव में 77 सीटें जीतकर बीजेपी मुख्य विपक्षी पार्टी बनी थी। पांच साल बाद सत्ता के शिखर पर है।
