इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नाबालिग बच्चों से यौन उत्पीड़न के मामले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को बड़ी राहत दे दी है। जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की अग्रिम जमानत याचिका को मंजूर कर लिया है। इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था और अंतिम फैसला आने तक उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने माना है कि यौन उत्पीड़न की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता लेकिन भी अभी तक डॉक्टरों ने कोई राय नहीं दी है।

 

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर POCSO ऐक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आरोप है कि प्रयागराज में आयोजित माघ मेला 2025-26 के दौरान नाबालिगों के साथ कथित यौन शोषण की घटना हुई। FIR में POCSO ऐक्ट की कई कड़ी धाराएं जैसे 3, 4(2), 6, 16, 17 और 51 शामिल हैं। खास तौर पर धारा 6 के तहत गंभीर अपराध में 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है।

 

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कोर्ट की बेंच ने इस मामले में कहा है, 'डॉक्टर की बनाई मेडिकल रिपोर्ट में पीड़ितों के शरीर पर किसी भी तरह की बाहरी चोट नहीं पाई गई है। साथ ही डॉक्टर ने यह भी कहा है कि यौन उत्पीड़न की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता इसलिए FSL रिपोर्ट मंगाई गई है। इससे साफ है कि डॉक्टर ने अभी तक यौन उत्पीड़न हुआ या नहीं इस पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। इसके अलावा, आरोपियों का मेडिकल टेस्ट भी नहीं कराया गया है जबकि ऐसे मामलों में यह जरूरी होता है।'

कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR

इस मामले में 21 फरवरी को झूंसी थाने में FIR दर्ज की गई थी। यह कार्रवाई तब हुई जब प्रयागराज की स्पेशल POCSO कोर्ट ने पुलिस को तत्काल केस दर्ज करने का निर्देश दिया। आरोप है कि पहले दी गई शिकायतों पर पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया था, जिसके बाद मामला अदालत तक पहुंचा।

 

यह पूरा मामला अशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की याचिका के बाद सामने आया। उन्होंने कोर्ट में दावा किया कि दो नाबालिगों (एक करीब 14 साल और दूसरा 17 साल 6 महीने) के साथ माघ मेले के दौरान यौन शोषण किया गया। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि यह कृत्य धार्मिक सेवा और शिष्य बनाने के नाम पर किया गया।