इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले में एक अस्थायी रूप से प्रतिबंधित जगह पर नमाज पढ़ने के आरोप में दो छात्रों के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। जस्टिस सौरभ श्रीवास्तव ने 17 फरवरी को दोनों छात्रों की याचिका मंजूर की और चार्जशीट तथा मजिस्ट्रेट कोर्ट में जारी समन आदेश को खारिज कर दिया।

 

यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 143 (गैरकानूनी जमावड़ा) और धारा 188 (सार्वजनिक अधिकारी के आदेश की अवज्ञा) से जुड़ा था। स्थानीय प्रशासन ने शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए कुछ जगहों पर नमाज पढ़ने पर अस्थायी रोक लगाई थी। लेकिन इन दो छात्रों ने उसी जगह पर नमाज अदा की, जिसके कारण उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई थी। पुलिस ने जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की और संत कबीर नगर की अदालत ने 2019 में दोनों को समन जारी किया था।

 

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हाई कोर्ट में दायर की थी याचिका

इसके बाद दोनों छात्रों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उनके वकील ने कहा कि छात्रों का कोई आपराधिक इतिहास नहीं है। वे सिर्फ छात्र हैं और उनका भविष्य इस केस से खराब हो सकता है। यह मामला छोटी-मोटी धाराओं का है, जो केवल नमाज पढ़ने की वजह से लगा। सरकारी वकील ने भी कोर्ट को बताया कि दोनों छात्रों का कोई पुराना क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं है।

 

कोर्ट ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है। संविधान के अनुसार हर धर्म के लोग अपनी धार्मिक प्रथा और विश्वास के अनुसार पूजा-पाठ कर सकते हैं। लेकिन साथ ही, समाज में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन के आदेशों और निर्देशों का पालन करना जरूरी है। ये निर्देश समाज के बड़े हित में दिए जाते हैं।

 

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कोर्ट ने रद्द किया आदेश

जस्टिस श्रीवास्तव ने फैसला देते हुए कहा कि दोनों छात्रों के खिलाफ कार्यवाही जारी रखना उचित नहीं है। इसलिए पूरी चार्जशीट और समन आदेश को उनके खिलाफ रद्द किया जाता है। लेकिन कोर्ट ने दोनों छात्रों को चेतावनी भी दी कि भविष्य में अगर स्थानीय प्रशासन कोई प्रतिबंध या निर्देश जारी करे, तो उसका पालन जरूर करें। यह शांति, सद्भाव और कानून-व्यवस्था के लिए जरूरी है।