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'जो झूठी FIR कराए, उस पर मुकदमा करो', इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस को दिए निर्देश

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिए हैं कि अगर कोई फर्जी केस दर्ज कराए तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज करके कानूनी कार्यवाही की जाए।

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प्रतीकात्मक तस्वीर, Photo Credit: Sora AI

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कई बार पुलिस और अदालत तक ऐसे कई मामले पहुंच जाते हैं जो बाद में फर्जी निकल जाते हैं। इसमें पुलिस के साथ-साथ अदालत का वक्त भी बर्बाद होता है। अब इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को निर्देश दिए हैं कि फर्जी केस दर्ज कराने वालों के खिलाफ अनिवार्य रूप से मुकदमा चलाए। हाई कोर्ट ने कहा है कि जो पुलिस अधिकारी ऐसा नहीं कर पाएंगे उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। हाई कोर्ट ने अलीगढ़ की एक महिला की उम्मे फरवा के मामले में सुनवाई के बाद ये निर्देश दिए हैं।

 

हाई कोर्ट के जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि ने अलीगढ़ की उम्मे फरवा की ओर से दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘इस अदालत ने जो निर्देश दिए हैं, अगर उनका अक्षरशः पालन नहीं किया जाता है तो यह अदालत की अवमानना के समान होगा और पीड़ित व्यक्ति पुलिस अधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों के ऐसे गलत आचरण के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए इस अदालत से संपर्क कर सकता है।’ अदालत ने बुधवार को दिए अपने आदेश में निर्देश दिया कि पुलिस महानिदेशक सभी पुलिस अधिकारियों को इस बारे में निर्देश देंगे। 

क्या है उम्मे फरवा का केस?

 

उम्मे फरवा के खिलाफ उनके पूर्व पति ने 2023 में एक एफआईआर दर्ज कराई थी। उनके पूर्व पति ने आरोप लगाए थे कि तलाक के बाद उम्मे फरवा और उनके नए पति उन्हें फेसबुक पर धमकी दे रहे थे। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने उम्मे फरवार के खिलाफ आईपीसी की धारा 504 और 507 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया था। बाद में जांच हुई तो पता चला कि ये सारे आरोप फर्जी थे। ऐसे में पुलिस ने अपनी फाइनल रिपोर्ट में उम्मे फरवा को 19 जून को बरी कर दिया।

 

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इस पर उनके पूर्व पति ने इस फैसले को चुनौती दी। 23 अक्तूबर 2024 को अलीगढ़ के चीफ जुडिशियिल मैजिस्ट्रेट ने यह याचिका स्वीकार कर ली है और क्लोजर रिपोर्ट खारिज कर दी। कोर्ट ने उम्मे फरवा को समन किया और ट्रायल का सामने करने को कहा। इसके बाद उम्मे फरवा ने CJM कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी।

CJM कोर्ट से हुई गलती

 

हाई कोर्ट ने शुरुआत में ही माना कि CJM कोर्ट के मैजिस्ट्रेट ने एक गलती की है। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में SHO ने अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल करके FIR दर्ज की और असंज्ञेय अपराध की जगह संज्ञेय अपराध में केस दर्ज कर लिया। ऐसे में हाई कोर्ट ने 23 अक्तूबर 2024 के अलीगढ़ CJM कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया और निर्देश दिए कि ऐसे मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ केस दर्ज किए जाएं।

 

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पुलिस अधिकारियों को कहा जाएगा कि अगर अंतिम रिपोर्ट में आरोपी को दोषमुक्त किया जाता है तो ऐसे हर मामले में जहां झूठी, तुच्छ या भ्रामक सूचना देकर पुलिस तंत्र का दुरुपयोग किया गया है तो उस केस में शिकायतकर्ता और गवाहों के खिलाफ एक लिखित शिकायत जरूर दर्ज कराई जाए। पुलिस महानिदेशक, पुलिस आयुक्त, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, साथ ही सभी जांच अधिकारियों, थाना अधिकारियों और अन्य अधिकारियों को इस संबंध में विशिष्ट निर्देश जारी किए गए हैं।


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