उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में माघ मेले के दौरान एक बड़ा विवाद हुआ था जिसे सभी ने देखा। इस विवाद में शंकराचार्य और राज्य सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप हुए। हालात ऐसे बने कि अविमुक्तेश्वरानंद को माघ मेला बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। उन्होंने प्रदेश सरकार पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। कुछ दिन बाद मामला शांत होता दिखा लेकिन अब एक नया विवाद सामने आया है। रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी ने शंकराचार्य पर बाल यौन शोषण जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने इस मामले की जांच कराने के लिए कोर्ट में शिकायत दर्ज कराई है।

 

आपको बता दें कि प्रयागराज की एक विशेष POCSO कोर्ट में यह शिकायत दर्ज कराई गई है। आशुतोष का आरोप है कि धर्म और गुरुकुल की आड़ में नाबालिग बच्चों के साथ यौन शोषण किया जा रहा है। अपने दावे को मजबूती देने के लिए उन्होंने कोर्ट में दो बच्चों को भी पेश किया है। 

 

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शिकायत में क्या-क्या आरोप लगाए गए? 

आशुतोष ने अपनी शिकायत में कई गंभीर आरोप लगाए है। शिकायत के मुताबिक, पिछले एक साल से बच्चों के साथ 'गुरु-सेवा' के नाम पर कुकर्म किया जा रहा था। बच्चों ने बताया कि उन्हें डरा-धमकाकर गलत काम कराए जाते थे। 

 

यौन शोषण के साथ-साथ यह भी आरोप है कि बच्चों से पालकी उठवाने, भीड़ जुटाने और निजी सेवा जैसे काम कराए जाते हैं जो बाल श्रम कानूनों का उल्लंघन है। रामभद्राचार्य के शिष्य ने यह भी दावा किया है कि अविमुक्तेश्वरानंद खुद को गलत तरीके से ज्योतिष्पीठ का शंकराचार्य बताते हैं। साथ ही फर्जी लेटरपैड का भी इस्तेमाल कर प्रशासन को गुमराह कर रहे हैं। 

 

पुलिस को दी गई शिकायत में शिविर के भीतर अवैध हथियार होने की आशंका जताई गई है और उनकी संपत्ति व बैंक खातों की जांच की मांग की गई है।

कैसे सामने आया यह पूरा मामला?

खबर के अनुसार, पीड़ित बच्चे किसी तरह अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर से भागकर आशुतोष महाराज के पास पहुंचे और उनसे मदद मांगी। आशुतोष महाराज ने पहले पुलिस कमिश्नर और झूंसी थाने में शिकायत की थी लेकिन जब पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया, तो उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

 

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अविमुक्तेश्वरानंद ने क्या कहा?

इस मामले पर अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि ये आरोप पूरी तरह राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा कि चूंकि वे 'गोमाता' की रक्षा के लिए सरकार और व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं इसलिए उन्हें फंसाने की साजिश रची जा रही है। उनके वकील ने कोर्ट में जवाब दाखिल कर दिया है और अब अगली सुनवाई 20 फरवरी को होनी तय हुई है।

 

यह विवाद अचानक नहीं हुआ है। इन विवादों को पीछे हुई घटनाओं से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हाल ही में माघ मेले के दौरान 18 जनवरी को मौनी अमावस्या पर पुलिस ने अविमुक्तेश्वरानंद की पालकी रोक दी थी। इसके बाद काफी धक्का-मुक्की और विवाद हुआ था।

कौन हैं आशुतोष?

आपको बता दें कि आशुतोष महाराज  रामभद्राचार्य के शिष्य हैं। इसके साथ ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले मे भी मुख्य पक्षकार हैं।