सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की याचिका खारिज कर दी। पार्टी ने 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द करने की मांग की थी। पार्टी का आरोप था कि चुनाव से पहले मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) का उल्लंघन हुआ।

 

जन सुराज पार्टी ने पहली बार बिहार विधानसभा का चुनाव लड़ा था। उसने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। यही नहीं ज्यादातर उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई। NDA ने इस चुनाव में 202 सीटें जीतीं और सत्ता में बनी रही। INDIA गठबंधन को मात्र 35 सीटों से संतोष करना पड़ा।

 

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वोटरों को लुभाने की कोशिश

पार्टी ने याचिका में कहा कि बिहार सरकार ने MCC लागू होने के बाद महिलाओं को मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत 10,000 रुपये ट्रांसफर किए। यह योजना चुनाव से ठीक पहले घोषित हुई थी। इससे वोटरों को लुभाने की कोशिश हुई और चुनाव की निष्पक्षता प्रभावित हुई। पार्टी ने पूरे राज्य के चुनाव को रद्द कर नए चुनाव कराने की मांग की।

कोर्ट ने लगाई फटकार

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने पार्टी को फटकार लगाई। CJI सूर्य कांत ने कहा, 'आपकी पार्टी को कितने वोट मिले? जब लोग आपको ठुकरा देते हैं, तो आप अदालत का इस्तेमाल पॉपुलैरिटी के लिए करते हैं!' उन्होंने कहा कि यह याचिका पूरे राज्य के चुनाव को एक साथ चुनौती देने वाली है, जो एक तरह की सामान्य चुनाव याचिका है।

 

कोर्ट ने कहा कि यह मामला सिर्फ एक राज्य से जुड़ा है, इसलिए पार्टी पटना हाई कोर्ट जाए। CJI ने कहा, 'कुछ मामलों में फ्रीबीज (मुफ्त चीजें) का गंभीर मुद्दा है, जिसे हम गंभीरता से देखेंगे। लेकिन हारे हुए पार्टी की तरफ से नहीं।'

 

जन सुराज के वकील सीनियर एडवोकेट सीयू सिंह ने कहा कि राज्य में भारी घाटा है। MCC लगने के बाद 35 लाख से ज्यादा महिलाओं को तुरंत 10,000 रुपये दिए गए। हालांकि, बेंच ने जवाब दिया कि यह डायरेक्ट ट्रांसफर नहीं है, बल्कि महिलाओं के सेल्फ हेल्प ग्रुप्स से जुड़ा है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी और पार्टी को पटना हाई कोर्ट जाने को कहा।

जीरो सीटें मिली थीं

बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए की भारी जीत हुई और इंडिया गठबंधन मात्र 35 सीटों पर ही सिमट कर ही रह गया था। इस बीच आरजेडी में भी काफी फूट देखने को मिली थी क्योंकि तेजप्रताप यादव पार्टी से अलग हो गए थे जिससे पार्टी को नुकसान हुआ।


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हालांकि, कुछ लोगों का मानना था कि जनुराज पार्टी चुनाव में बेहतर प्रदर्शन कर सकती है, लेकिन ऐसा हो न सका। जनसुराज पार्टी न सिर्फ जीरो पर सिमट गई बल्कि कुछ सीटों पर जमानत जब्त होने की नौबत आ गई। इसके बाद पीके ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी।