बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब राजनीति में आ रहे हैं। जेडीयू ने शुक्रवार को पुष्टि की कि निशांत कुमार रविवार, 8 मार्च को पार्टी में शामिल होंगे। यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है। नीतीश कुमार पिछले कई सालों से परिवारवाद के खिलाफ बोलते आए हैं। वह अक्सर RJD के लालू प्रसाद यादव पर परिवारवाद का आरोप लगाते थे लेकिन अब उनके इकलौते बेटे निशांत राजनीति में कदम रख रहे हैं।

 

नीतीश कुमार ने गुरुवार, 5 मार्च को राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल किया। इससे पता चलता है कि वह अब मुख्यमंत्री पद छोड़कर दिल्ली जा सकते हैं। वह 20 साल से ज्यादा समय से बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। 2025 में NDA ने बड़ी जीत हासिल की और नीतीश कुमार ने 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

 

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क्या बोली पार्टी?

पार्टी के नेता नीरज कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और सांसद संजय झा ने सुझाव दिया कि निशांत कुमार को पार्टी में लाया जाए। पार्टी ने इस सुझाव का स्वागत किया। निशांत ने भी हामी भर दी है। वे पार्टी में शामिल होने के बाद राज्य में राजनीतिक दौरा भी करेंगे।

 

 

 

 

पार्टी नेताओं ने कहा कि नीतीश के राज्यसभा जाने के फैसले से सब दुखी हैं लेकिन पार्टी उनके साथ है। नीतीश ने कहा है कि वह पटना में रहेंगे और पार्टी को गाइड करते रहेंगे। वह बिहार के विकास के लिए नई सरकार का पूरा सहयोग करेंगे।

बताया- होली का तोहफा

कुछ JD(U) नेताओं जैसे अशोक चौधरी और श्रवण कुमार ने निशांत के आने को 'होली का तोहफा' बताया है। पार्टी कार्यकर्ता लंबे समय से परिवार से ही उत्तराधिकारी चाहते थे ताकि पार्टी का आधार मजबूत रहे।

 

निशांत कुमार अब तक लो प्रोफाइल रहे हैं। वह BIT मेसरा से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। पहले उन्होंने कहा था कि उन्हें राजनीति में कोई रुचि नहीं है। लेकिन अब नीतीश की सेहत और पार्टी के भविष्य को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।

डिप्टी सीएम बनाने की अटकले

कई लोग अटकलें लगा रहे हैं कि निशांत को उप-मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है या पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। इससे पार्टी में नेतृत्व का कोई खालीपन न रहे।


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नीतीश कुमार ने एक मैसेज में कहा, 'मैं राज्यसभा जा रहा हूं। आप सबके लिए कोई समस्या नहीं होगी। मैं बिहार में रहूंगा। सब काम चलते रहेंगे। बिहार के विकास के लिए मेहनत करें। मैं सब पर नजर रखूंगा, चिंता मत करें।' यह फैसला बिहार की राजनीति में नया अध्याय शुरू कर सकता है।