संजय सिंह, पटना। बिहार में वरिष्ठ नेता केसी त्यागी पर सियासी बहस तेज हो गई है। इस बहस की शुरुआत तब हुई जब पार्टी प्रवक्ता राजीव रंजन ने यह बयान दिया कि त्यागी के बयान से जदयू का कोई लेना देना नहीं है। एक समय नीतीश और त्यागी की जोड़ी काफी मजबूत थी। नीतीश उनके हर फैसले को मानते थे। लगभग दो वर्षों से यह दूरी बढ़ने लगी। दूसरी तरफ जदयू ने विधानसभा चुनाव में पार्टी विरोधी गतिविधि में शामिल एक दर्जन नेताओं को पार्टी से निकाल दिया है।
केसी त्यागी कद्दावर समाजवादी नेता हैं। उनका राजनीतिक रिश्ता नीतीश, लालू और शरद यादव जैसे नेताओं से रहा है। बेहतर राजनीतिक समझ होने के कारण उन्हें जदयू में बड़ी भूमिका भी मिली। उन्होंने यूपी के मेरठ से सांसद का चुनाव भी लड़ा। इसके बाद साल 2013 में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा। 2023 में त्यागी को जदयू का मुख्य प्रवक्ता बनाया गया। वे राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी के सलाहकार थे।
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बताया जा रहा है कि त्यागी का प्रभाव जदयू में बढ़ता जा रहा था। यह बात नीतीश कुमार के कुछ करीबी नेताओं को रास नहीं आ रही थी। एक केंद्रीय मंत्री त्यागी को बिल्कुल पसंद नहीं करते थे। उनकी पूरी कोशिश थी कि त्यागी को किसी तरह किनारे लगाया जाए। वे काफी हद तक सफल ही रहे। सबसे पहले उन्हें पार्टी के मुख्य प्रवक्ता पद से हटाया गया। धीरे-धीरे पार्टी के अन्य नेताओं ने भी किनारा करना शुरू कर दिया। दूसरी तरफ त्यागी भी अपने स्वाभिमान के आगे झुकने की जरूरत नहीं समझी। नतीजा यह रहा कि वे एक साल से अलग थलग पड़े थे।
पार्टी ने क्यों किया किनारा?
केसी त्यागी पार्टी के कामकाज से नाराज थे। कुछ दिन पहले आईपीएल में बांग्लादेशी क्रिकेटर खरीदने पर हंगामा मचा। इस मामले में केसी त्यागी ने एक बयान दिया। कहा जाता है कि उनके इस बयान पर बीजेपी के कई नेता खफा थे। जदयू को किरकिरी का सामना करना पड़ा, लेकिन त्यागी अपने बयान पर टिके रहे। दो दिन पहले केसी त्यागी ने पीएम मोदी को एक पत्र लिखा। इसमें नीतीश कुमार के लिए भारत रत्न की मांग की, ताकि बिगड़े सियासी रिश्तों को सुधारा जा सके।
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पत्र में कहा कि नीतीश कुमार ने कर्पूरी ठाकुर की विरासत को बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया। इसलिए उन्हें भारत रत्न की उपाधि दी जाए। त्यागी के इस पत्र राजद ने कहा कि नीतीश कुमार अब समाजवादी नेता नहीं रहे, बल्कि वे स्वार्थ और संप्रदायिक सियासत करने लगे हैं।
क्या बोले जदयू प्रवक्ता?
पार्टी के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा है कि त्यागी का बयान व्यक्तिगत है। पार्टी का इससे कोई लेना देना नही है। उन्होंने यह भी कहा कि त्यागी अब जदयू की नीतियों, फैसलों और आधिकारिक रुख का प्रतिनिधित्व नही करते हैं। उनके बयान को उनका निजी विचार माना जाना चाहिए। इस बयान के बाद सियासी गलियारे में यह चर्चा जोर शोर से शुरु हो गई कि त्यागी को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। हालांकि जदयू से त्यागी के पुराने संबंधों के कारण कोई भी नेता यह कहने से परहेज कर रहा है।
जदयू ने 12 नेताओं को निकाला
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट बंटवारे को लेकर जदयू में भी घोर असंतोष था। कई लोगों को चाहने के बाद भी टिकट नहीं मिला। ये लोग पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हो गए। अधिकृत प्रत्याशियों को हराने के लिए बागियों ने कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। ऐसे लोगों की पहचान के लिए पार्टी ने एक कमेटी बनाई थी। कमेटी ने जांच पड़ताल के बाद विधायक अशोक सिंह समेत संगठन से जुड़े एक दर्जन नेताओं को छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया है।
