संजय सिंह, पटना। बिहार में बढ़ते अपराधों के पीछे अवैध हथियारों की भूमिका चिंता का विषय बनी है। अब इस चुनौती से निपटने के लिए बिहार एसटीएफ ने एक बड़ा और संगठित अभियान शुरू किया है। इस अभियान का उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना नहीं, बल्कि उस पूरी सप्लाई चेन को जड़ से खत्म करना है, जो अवैध हथियारों को अपराधियों तक पहुंचाती है।
250 तस्करों की सूची बनी
एसटीएफ के आर्म्स सेल ने पूरे राज्य में सक्रिय करीब 250 बड़े हथियार सप्लायरों और तस्करों की पहचान की है। इनकी विस्तृत सूची तैयार की जा रही है। 10 कुख्यात तस्करों के नामों को भी शामिल किया गया है। यह सूची केवल आंकड़ा नहीं, बल्कि कार्रवाई का रोडमैप है। हर नाम के पीछे उसकी गतिविधि, नेटवर्क और संपर्कों की गहराई से जांच की जा रही है।
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डीआईजी के नेतृत्व में चलेगा ऑपरेशन
इस पूरे ऑपरेशन की कमान डीआईजी संजय कुमार के हाथों में होगी। उनकी निगरानी में एसटीएफ उन लोगों पर विशेष नजर रख रही है, जो मिनी गन फैक्ट्रियों में हथियार बनाते हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि बिहार में होने वाले लगभग 90 प्रतिशत अपराधों में देसी पिस्टल का इस्तेमाल होता है। इसका स्थानीय स्तर पर निर्माण किया जाता है। अब पुलिस ने अवैध हथियारों को रखने वालों के अलावा तस्करी करने वालों को भी रडार पर लिया है।
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इन राज्यों से हो रही कारतूस की तस्करी
जांच में यह भी पता चला है कि हथियारों का निर्माण भले ही बिहार में किया जा रहा है, लेकिन कारतूसों की तस्करी अन्य राज्यों से होती है। पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा और झारखंड से बड़े पैमाने पर इनकी तस्करी होती है। इस कड़ी को तोड़ने के लिए एसटीएफ की टीमें अब इन राज्यों तक पहुंचकर नेटवर्क को खंगाल रही हैं। एसटीएफ ने डिजिटल निगरानी को तेज कर दिया है, ताकि सबूतों के अभाव में अपराधियों को किसी भी प्रकार की राहत न मिल सके।
