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पिंक टैक्स क्या है? महिलाओं के सामान अक्सर महंगे क्यों होते हैं

पिंक टैक्स की वजह से महिलाओं को हर छोटे-बड़े सामान के लिए ज्यादा रुपये देने पड़ते हैं। यह कहानी बताती है कि कैसे बाजार महिलाओं की जेब पर चुपचाप बोझ डाल रहा है।

What is Pink Tax

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

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पिंक टैक्स कोई सरकारी टैक्स नहीं है। यह असल में बाजार की एक चालाकी है। इसमें महिलाओं के इस्तेमाल वाली चीजों को पुरुषों की चीजों से महंगा बेचा जाता है। जैसे अगर लड़कों का नीला रेजर 20 रुपये का है तो लड़कियों वाला वही रेजर गुलाबी रंग की पैकिंग में 25 या 30 रुपये का मिलता है। सिर्फ रंग और दिखावट बदलकर महिलाओं से ज्यादा रुपये वसूलना ही 'पिंक टैक्स' है। यह कपड़ों, परफ्यूम और यहां तक कि बाल कटवाने जैसी सर्विस पर भी लिया जाता है।

 

इस भेदभाव के बारे में सबसे पहले 1994 में अमेरिका के कैलिफोर्निया में पता चला था। वहां रिसर्च में देखा गया कि महिलाओं के ब्यूटी प्रोडक्ट्स लड़कों के मुकाबले 13 प्रतिशत महंगे थे। ब्रिटेन में तो चेहरे की क्रीम 34 प्रतिशत तक महंगी बेची जा रही थी। इसी भेदभाव को देखते हुए साल 2017 में संयुक्त राष्ट्र (UN) ने पूरी दुनिया को इसे रोकने की सलाह दी थी।

 

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भारत में पिंक टैक्स की स्थिति

भारत में बहुत कम लोगों को इसके बारे में पता है। साल 2018 में जब सरकार ने सैनिटरी पैड्स पर से टैक्स हटाया, तब इस मुद्दे पर थोड़ी चर्चा शुरू हुई। आज भी भारत में महिलाएं जाने-अनजाने में स्किन केयर और सैलून में पुरुषों से ज्यादा रुपये दे रही हैं।

महिलाओं पर इसका असर

पिंक टैक्स महिलाओं के बजट को खराब करता है:

 

कम कमाई और ज्यादा खर्च: महिलाओं की कमाई अक्सर पुरुषों से कम होती है, फिर भी उन्हें सामान महंगा मिलता है।

 

बचत में कमी: फालतू खर्च की वजह से घर की बचत कम हो जाती है।

 

बड़ा आर्थिक नुकसान: अगर पूरी जिंदगी का हिसाब जोड़ें, तो एक महिला सिर्फ इस भेदभाव की वजह से लाखों रुपये फालतू खर्च कर देती है।

इस खर्च से कैसे बचें?

थोड़ी सावधानी से आप अपने रुपये बचा सकती हैं:

 

पुरुषों वाले सामान का इस्तेमाल: अगर रेजर या शैम्पू की क्वालिटी एक जैसी है तो लड़कों वाला पैक खरीदें क्योंकि वह सस्ता होता है।

 

कीमतों को चेक करें: सामान लेने से पहले देखें कि क्या वही चीज लड़कों के लिए कम दाम में मिल रही है।

 

सैलून में बात करें: अगर हेयरकट एक जैसा है तो जेंडर के नाम पर ज्यादा रुपये न दें।

 

जागरूक बनें: सिर्फ उन्हीं कंपनियों से सामान खरीदें जो दाम में भेदभाव नहीं करतीं।

 

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भारत में कानून और नियम

भारत में अभी पिंक टैक्स के खिलाफ कोई सख्त कानून नहीं बना है। हालांकि उपभोक्ता अदालतों का कहना है कि कंपनियों को जेंडर के आधार पर कीमत नहीं बढ़ानी चाहिए। अभी आपकी जानकारी ही आपका सबसे बड़ा बचाव है।

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