logo

मूड

ट्रेंडिंग:

दिल्ली की भयंकर गर्मी का बुरा असर, गरीब बस्तियों की गर्भवती महिलाएं बेहाल

दिल्ली की भीषण गर्मी और तपती झुग्गियों ने गर्भवती महिलाओं की सेहत बिगाड़ दी है। उमस और बढ़ते ब्लड प्रेशर के कारण इन महिलाओं और उनके होने वाले बच्चों पर गंभीर खतरा बना रहता है।

AI Generated Image

प्रतीकात्मक तस्वीर, AI Generated Image

शेयर करें

google_follow_us

संबंधित खबरें

Advertisement
Advertisement

दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए यह गर्मी जानलेवा साबित हो रही है। जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है, तो इन महिलाओं का जीवन दुश्वार हो जाता है। झुग्गियों के छोटे और तंग कमरों में, जहां हवा के आने-जाने का रास्ता कम होता है, वहां की उमस और गरमी में सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है। इन महिलाओं को रात-रात भर नींद नहीं आती, चक्कर आते हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ने जैसी गंभीर परेशानियां हो रही हैं। 

 

सबसे दुखद बात यह है कि गरीबी के कारण ये महिलाएं किसी ठंडी जगह पर नहीं जा सकतीं और न ही अपनी रहने की स्थिति को सुधार सकती हैं। यह स्थिति न सिर्फ इन गर्भवती महिलाओं के लिए खतरनाक है, बल्कि उनके पेट में पल रहे मासूम बच्चों की सेहत पर भी बुरा असर डाल रही है। रात के समय कमरों में इतनी ज्यादा गर्मी और घुटन होती है कि ये महिलाएं पूरी रात सो नहीं पातीं, जिससे उनकी थकान और बीमारी और बढ़ जाती है।

 

यह भी पढ़ें: उम्र 55 पार, फिटनेस में 30 वाले शर्मा जाएं, मिलिंद, अक्षय, सलमान करते क्या हैं?

रेखा की परेशानी और 38 हफ्ते का गर्भ

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दक्षिणपुरी के संजय कैंप में रहने वाली रेखा अपनी प्रेग्नेंसी के बिल्कुल आखिरी दौर में हैं, उनका 38वां हफ्ता चल रहा है। उनके घर की छत टिन की बनी है, जो सूरज की रोशनी में किसी तवे की तरह गरम हो जाती है। रेखा का कहना है कि इस भयंकर गर्मी और उमस की वजह से उन्हें सांस लेने में बहुत दिक्कत होती है और वह रात भर बेचैन रहती हैं। उन्हें अक्सर घबराहट महसूस होती है और नींद बिल्कुल नहीं आती। लोग उन्हें सलाह तो देते हैं कि वह किसी अच्छी और ठंडी जगह पर जाकर रहें लेकिन उनके पास इतने पैसे नहीं हैं कि वह कहीं और जा सकें। वह बस एक पुराने पंखे के नीचे बैठकर इस उम्मीद में दिन काट रही हैं कि कब उन्हें इस तपन से राहत मिलेगी।

शबनम और आयशा की समस्या

मिनी सुभाष कैंप की 29 साल की शबनम जो अपनी प्रेग्नेंसी के 29वें हफ्ते में हैं बताती हैं कि पिछले कुछ दिनों से उन्हें लगातार सिरदर्द और घबराहट हो रही है। उन्हें अपनी प्रेग्नेंसी के दूसरे स्टेज (second trimester) से ही ठीक से नींद नहीं आ रही है। वहीं 28 साल की आयशा जो अपनी प्रेग्नेंसी के तीसरे स्टेज (third trimester) में हैं कहती हैं कि रात के 2 से 3 बजे तक जब तक मौसम थोड़ा ठंडा नहीं होता तब तक सोना मुमकिन नहीं होता। गर्मी और उमस ने इन महिलाओं की बेचैनी बहुत बढ़ा दी है।

डॉक्टरों की चेतावनी

एम्स के डॉक्टर हर्षल रमेश साल्वे का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को चक्कर आना, उल्टी या बेहोशी जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उनके मुताबिक अगर प्रेग्नेंसी के दूसरे स्टेज में बहुत ज्यादा गर्मी लगती है तो इससे बच्चे के विकास में रुकावट आ सकती है और जन्मजात बीमारियां हो सकती हैं। साथ ही प्रेग्नेंसी के आखिरी स्टेज में गर्मी की वजह से समय से पहले डिलीवरी होने या मरे हुए बच्चे के पैदा होने का भी बड़ा डर रहता है।

 

यह भी पढ़ें: बोरिंग लुक को कहें बाय, ये 5 ट्रेंडी ज्वेलरी आपको बना देंगी स्टाइल क्वीन

बचाव के तरीके

विशेषज्ञ भारती चतुर्वेदी के मुताबिक, गर्मी का सबसे बुरा असर महिलाओं के दिल की धड़कन और ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। डॉक्टरों का कहना है कि इस स्थिति से बचने के लिए महिलाओं को खूब पानी पीना चाहिए और खुद को जितना हो सके ठंडा रखना चाहिए। प्रशासन को भी चाहिए कि वह इन गरीब इलाकों में गर्मी से बचने के उपाय पहुंचाए जैसे छतों के मटेरियल में बदलाव और काम की जगह पर छाया का इंतजाम ताकि ये महिलाएं सुरक्षित रह सकें।


और पढ़ें