शिवपुरी जिले के करेरा में 16 अप्रैल को हुई एक सड़क दुर्घटना ने अब राजनीतिक रूप से काफी बड़ा रूप ले लिया है। बीजेपी विधायक प्रीतम लोधी के बेटे दिनेश लोधी पर तेज रफ्तार थार एसयूवी से पांच लोगों को कुचलने का आरोप है। सबसे बड़ी बात यह है कि विधायक पहले तो न्याय की बात कर रहे थे, लेकिन अब पुलिस अधिकारियों को खुलेआम धमकी दे रहे हैं।
16 अप्रैल सुबह करीब 7:30 बजे करेरा में संजय परिहार, आशीष परिहार और अंशुल परिहार मोटरसाइकिल पर तहसील ऑफिस जा रहे थे। उनके आगे सड़क पर सीता वर्मा और पूजा सोनी पैदल चल रही थीं। आरोप है कि दिनेश लोधी ने तेज रफ्तार में काली थार चलाई और पहले दोनों महिलाओं को टक्कर मार दी, फिर मोटरसाइकिल को रौंद दिया। सभी पांच लोग घायल हो गए।
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विधायक का यू-टर्न
दुर्घटना के तुरंत बाद विधायक प्रीतम लोधी ने फेसबुक पर लिखा था - 'विधायक के लिए बेटा या परिवार पहले नहीं, जनता पहले है। पुलिस को करेरा के पीड़ितों को न्याय दिलाना चाहिए।' लोग इसे अच्छा कदम मान रहे थे लेकिन कुछ दिनों बाद ही सब बदल गया।
विधायक ने करेरा के एसडीओपी आयुष जाखड़ पर हमला बोल दिया। उन्होंने कहा, 'करेरा के एसडीओपी ने मेरे बेटे को यहां दोबारा न दिखने की चेतावनी दी है। मैं पूछता हूं, क्या करेरा आपके 'डैडी' का है? मेरा बेटा करेरा आएगा और चुनाव भी लड़ेगा। अगर आपके 'डैडी' में हिम्मत है तो रोक लें।'
विधायक ने और आगे कहा, 'अगर झूठे आरोप लगाए गए, दबाव बनाया गया या पक्षपातपूर्ण जांच हुई तो हम बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम जवाब देंगे। ऐसे अधिकारी अपनी हद में रहें।'
बेटे का बेशर्मी भरा रवैया
जब दिनेश लोधी को पुलिस स्टेशन बुलाया गया तो वह उसी थार गाड़ी से पहुंचा, जिससे दुर्घटना हुई थी। गाड़ी पर नंबर प्लेट नहीं थी, काली फिल्म लगी थी और हूटर भी लगा था। पुलिस ने इन उल्लंघनों पर चालान काटा।
पूछताछ में दिनेश ने कहा कि उन्होंने बार-बार हॉर्न बजाया और सायरन भी बजाया लेकिन आगे वाले ने रास्ता नहीं दिया जिसकी वजह से ओवरटेक करते हुए दुर्घटना हो गई।
पीड़ितों से मिलने नहीं गए
घायल लोगों का कहना है कि दुर्घटना के बाद न तो विधायक आए और न ही उनका बेटा। एक पीड़ित ने कहा, 'हमारी हालत पूछने तक कोई नहीं आया।'
दिनेश लोधी का पहले भी विवादों से नाता रहा है। 2023 में किसी को धमकाने का केस, 2024 में ग्वालियर में पड़ोसियों को गाड़ी से कुचलने की कोशिश का आरोप और जेल जाना शामिल है। उनके ऊपर एक्सटॉर्शन के आरोप भी लगे हैं।
विधायक प्रीतम लोधी पर भी दशकों पुराने कई आपराधिक मामले हैं - दंगा, मारपीट, हत्या और हत्या के प्रयास के केस। 2022 में विवादित बयानों पर उन्हें पार्टी से निकाला गया था, बाद में चुनाव से पहले वापस लिया गया।
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विधायक का बचाव
प्रीतम लोधी का कहना है कि उन्होंने ही एसपी से बात कर FIR दर्ज कराई, गाड़ी पुलिस स्टेशन भेजी और बेटे को पूछताछ के लिए भेजा। लेकिन पीड़ितों और पुलिस के रवैये से साफ है कि मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव बन चुका है।
