उत्तर प्रदेश की एक अदालत ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। उन पर और उनके शिष्य पर यौन शोषण के आरोप हैं। कोर्ट के आदेश के बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में अब मामला दर्ज किया जाएगा।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने सेक्शन 173(4) के तहत अर्जी दी थी। इसमें उन्होंने एफआईआर दर्ज करने और मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
अब प्रयागराज की स्पेशल पोक्सो कोर्ट के एडीजे विनोद कुमार चौरसिया ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट के आदेश के बाद झूंसी थाने में मामला दर्ज किया जाएगा। अदालत ने पुलिस को पूरे मामले की गंभीरता से जांच का भी निर्देश दिया है।
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चर्चा में क्यों स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती?
उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की खूब चर्चा है। दरअसल, 18 जनवरी को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पालकी पर सवार होकर मौनी अमावस्या पर संगम स्नान करने पहुंचे थे। मगर भारी भीड़ का हवाला देकर पुलिस ने उन्हें रोक दिया और पालकी की जगह पैदल जाने को कहा।
इस पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने पुलिस पर संगम स्नान करने से रोकने और अपमान करने का आरोप लगाया और करीब 11 दिनों तक धरने पर बैठे। इस बीच प्रयागराज जिला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को एक नोटिस जारी किया। इसमें शंकराचार्य होने का सबूत मांगा। इन नोटिस के बाद मामला और बढ़ गया।
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बाद में बरेली नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य के अपमान का मुद्दा उठाया और अपने पद से इस्तीफा दे दिया। वहीं जीएसटी विभाग के उपायुक्त प्रशांत कुमार सिंह ने सरकार के समर्थन में इस्तीफा दिया।
