वाराणसी पुलिस ने एक चौंकाने वाले मामले का खुलासा किया है। पुलिस 24 साल के एक युवक को अपने दोस्त की गला दबाकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। कहा जा रहा है कि आरोपी को उसके दोस्त ने कथित तौर पर गाय का मांस खिला दिया था जिसकी वजह से उसने उसकी हत्या कर दी।
पुलिस से मुताबिक आरोपी वीरेंद्र यादव ने 28 साल के आफताब आलम की गला दबाकर हत्या कर दी और वाराणसी के सिंधौरा एरिया में उसकी लाश को फेंक दिया। वीरेंद्र वाराणसी का ही रहने वाला है जबकि आफताब बिहार का रहने वाला है।
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खिलाया था बीफ
सिंधौरा के एसएचओ ज्ञानेंद्र त्रिपाठी ने मीडिया को बताया कि पूछताछ के दौरान वीरेंद्र ने कहा कि आफताब ने धोखा देकर उसे गाय का मांस खिला दिया और बाद में बाकी के दोस्तों में इस बात का खुलासा कर दिया जिससे बाकी के लोग उसका मजाक बनाने लगे। इसी से परेशान होकर उसने आफताब की हत्या कर दी।
हालांकि, आफताब के पिता ने इस बात से इनकार किया है। उनका कहना है कि आफताब के दोस्त हर कम्युनिटी से थे और उन्होंने कभी भी इस तरह की बातें नहीं कहीं। मामला 8 जनवरी को सामने आया, जब पुलिस को एक खुले खेत में पड़ी लाश के बारे में जानकारी मिली। उस समय मृतक की पहचान नहीं हो पाई थी। बाद में अधिकारियों को लाश के पास एक बैग मिला जिसमें एक पहचान पत्र था, जिससे पीड़ित की पहचान आफताब आलम के रूप में हुई। इसके बाद बिहार में उसके परिवार को सूचना दी गई और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया।
खेत में मिली लाश
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस ने आफताब के फोन और बैंकिंग रिकॉर्ड की जांच की। अधिकारियों को पता चला कि मौत से कुछ दिन पहले वह एक खास फोन नंबर के रेगुलर संपर्क में था। बाद में वह नंबर वीरेंद्र का निकला।
पुलिस को एक बैंक ट्रांजैक्शन भी मिला जिसमें आफताब के अकाउंट से वीरेंद्र के अकाउंट में ₹40,000 ट्रांसफर किए गए थे। उसी समय के आसपास, वीरेंद्र का मोबाइल फोन बंद था, जिससे शक और बढ़ गया। थोड़ी तलाश के बाद, पुलिस ने सोमवार को वीरेंद्र को वाराणसी में ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया।
हेल्पर का काम करते थे
पुलिस ने बताया कि दोनों आदमी बेंगलुरु की एक कंपनी में हेल्पर के तौर पर काम करते थे। आफताब का हाल ही में चेन्नई ट्रांसफर हुआ था, जबकि वीरेंद्र गुजरात में पोस्टेड था। दोनों अविवाहित थे। पुलिस के अनुसार, आफताब छुट्टी पर बिहार में अपने होमटाउन गया था और बाद में उसने वीरेंद्र को बताया कि वह काम पर वापस चेन्नई जाने के लिए 7 जनवरी को निकलेगा।
वाराणसी बुला के हत्या
पुलिस का आरोप है कि वीरेंद्र ने आफताब से वाराणसी आने को कहा। उसने कथित तौर पर काम से छुट्टी ली और पहले ही वहां चला गया। दोनों 7 जनवरी को वाराणसी रेलवे स्टेशन पर मिले और थोड़ी देर बात की।
पुलिस ने बताया कि उसी शाम वीरेंद्र एक दूसरे आदमी के साथ मोटरसाइकिल पर लौटा। आफताब को घर ले जाने के बहाने, वे कथित तौर पर उसे स्टेशन के पास एक सुनसान जगह पर ले गए।
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हमले के बाद फरार
पुलिस के अनुसार, आफताब पर वहीं हमला किया गया और गला घोंटकर मार डाला गया। फिर उसकी लाश एक खेत में फेंक दी गई, जिसके बाद आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने दावा किया कि बाद में उन्होंने वीरेंद्र के पास से आफताब का पैन कार्ड, आधार कार्ड और दूसरे पर्सनल डॉक्यूमेंट बरामद किए।
