2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा से 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना की शुरुआत की थी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में लगातार बिगड़ रहे लिंगानुपात में सुधार करना था। यह सच है कि बीते सालों में हरियाणा के लिंगानुपात में कुछ हद तक सुधार हुआ है और कई आंकड़े इसकी पुष्टि भी करते हैं, लेकिन इसके बावजूद आज भी कुछ घटनाएं सामने आ जाती हैं जो यह दिखाती हैं कि समाज में बेटे की चाह अब भी गहराई से मौजूद है। ऐसी ही एक घटना हरियाणा के जींद जिले से सामने आई है, जहां एक 38 वर्षीय महिला ने 10 बेटियों के बाद एक बेटे को जन्म दिया। इस खबर के सामने आने के बाद एक बार फिर लिंगानुपात और समाज की सोच को लेकर बहस तेज हो गई है।
उचाना कलां की रहने वाली 38 साल की ऋतु देवी ने अपनी 11वीं डिलीवरी में एक बेटे को जन्म दिया है। आपको बता दें कि ऋतु की शादी को 23 साल हो चुके हैं और उनके घर में पहले से ही 10 बेटियां हैं। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पिछले दो हफ्तों के भीतर हरियाणा में यह दूसरी ऐसी घटना है जहां बेटे की उम्मीद में किसी महिला ने 11वीं बार बच्चे को जन्म दिया है।
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बेटियों का नाम 'काफी' और 'माफी'
ऋतु के पति सुरेंद्र वाल्मीकि, जो एक सफाई कर्मचारी हैं ने बताया कि परिवार दशकों से एक बेटे का इंतजार कर रहा था। बेटे की चाहत इस कदर हावी थी कि उन्होंने अपनी बेटियों के नाम 'काफी' और 'माफी' तक रख दिए थे, ताकि शायद अब बेटियां होना बंद हो जाएं। सुरेंद्र के अनुसार, समाज में प्रतिष्ठा और भविष्य के सहारे की उम्मीद ने उन्हें इतने वर्षों तक प्रयास करने पर मजबूर किया। हालांकि उन्होंने अपनी सभी बेटियों को पढ़ाने का दावा भी किया है।
घटनाओं से जुड़ी चुनौतियां
डॉक्टरों की मानें तो 11वीं बार मां बनना किसी भी महिला के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। सिविल अस्पताल के डॉ. योगेश शर्मा ने बताया कि डिलीवरी के समय ऋतु का ब्लड प्रेशर काफी बढ़ गया था, जिसे कड़ी मशक्कत के बाद कंट्रोल कर लिया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार प्रेग्नेंट होने से महिला के गर्भाशय और शरीर पर बेहद बुरा असर पड़ता है।
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इस महीने की शुरुआत में, फतेहाबाद जिले की एक 37 साल की महिला ने भी 10 बेटियों के बाद एक बेटे को जन्म दिया। इसको देखे हुए हेल्थ एक्सपर्ट्स ने बार-बार प्रेग्नेंसी से महिला के शरीर और यूट्रस पर पड़ने वाले गंभीर शारीरिक असर के बारे में चिंता जताई है।
सुधरता ग्राफ लेकिन मानसिकता वही
दिलचस्प बात यह है कि हरियाणा में 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' जैसे बड़े अभियान चलाए जा रहे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, राज्य का लिंगानुपात 2024 के 910 से सुधरकर 2025 में 923 पहुंच गया है लेकिन जींद और फतेहाबाद की ये घटनाएं दर्शाती हैं कि आज भी जमीन पर 'वंश चलाने के लिए बेटे' की जरूरत, बेटियों के वजूद और मां की सेहत से बड़ी बनी हुई है।
