दक्षिण भारत के कर्नाटक राज्य में मंगलवार, 18 मार्च की शाम को मौसम ने ऐसा यू-टर्न लिया कि लोग अपनी आंखों पर यकीन नहीं कर पाए। धारवाड़ जिले के कलघटगी कस्बे और आसपास के गांवों में अचानक हुई भीषण ओलावृष्टि ने पूरे सीन को बदल दिया। चिलचिलाती गर्मी के बीच हुई इस ओलावृष्टि ने खेतों, सड़कों और घरों की छतों को सफेद चादर से ढक दिया, जिससे पूरा इलाका किसी उत्तर भारतीय हिल स्टेशन जैसा नजर आने लगा।

 

इस अप्रत्याशित मौसम ने जहां स्थानीय लोगों को हैरत में डाल दिया, वहीं जनजीवन भी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में लोग ओलों की मोटी परतों के बीच चलते और खेलते नजर आ रहे हैं। कई इंटरनेट यूजर्स तो इस नजारे को देखकर इतने दंग रह गए कि उन्होंने इसे AI वीडियो तक करार दे दिया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने पुष्टि की है कि यह कुदरत का वास्तविक बदलाव था, जिसने पल भर में धारवाड़ को 'मिनी मनाली' बना दिया।

 

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भीषण ओलावृष्टि के कारण कलघटगी और आसपास के इलाकों में सड़कें कांच की तरह फिसलन भरी हो गईं। बड़े-बड़े ओलों की वजह से कई वाहन बीच रास्ते में ही फंस गए और ड्राइवरों को अनहोनी के डर से गाड़ियां रोकनी पड़ीं। ओलों की परत इतनी मोटी थी कि बर्फ पिघलने के बाद ही यातायात धीरे-धीरे सामान्य हो सका। खेतों में खड़ी फसलों को भी इस बेमौसम मार से नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है क्योंकि ओलों ने उपजाऊ जमीन को पूरी तरह सफेद मैदान में तब्दील कर दिया था।

मौसम विभाग का अलर्ट

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि यह मौसमी हलचल अभी थमने वाली नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, 20 मार्च तक कर्नाटक के तटीय, उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी रहेगी। बेंगलुरु, मैसूर, हासन, कोलार और तुमकुरु जैसे जिलों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने का 'यलो अलर्ट' जारी किया गया है।

 

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अचानक बदले इस मिजाज को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने निवासियों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे गरज-चमक और तेज हवाओं के दौरान घरों के अंदर ही रहें और खुले मैदानों या पेड़ों के नीचे शरण न लें। तेज हवाओं के कारण बिजली के खंभे गिरने और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं भी आ सकती हैं। प्रशासन ने किसानों को भी अपनी कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखने का सुझाव दिया है ताकि बेमौसम बारिश से नुकसान को कम किया जा सके।