हरियाणा में IDFC फर्स्ट बैंक में हुई 590 करोड़ की गड़बड़ी के आरोप में छानबीन तेज हो गई है। अब राज्य के विजिलेंस और ऐंटी करप्शन ब्यूरो ने इस केस में अब चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दो लोग IDFC फर्स्ट बैंक के दो पूर्व कर्मचारी हैं। बाकी के दो लोग एक पार्टनर कंपनी के मालिक हैं। अधिकारियों ने बताया है कि जांच के दौरान इन चारों लोगों को मंगलवार शाम को ही गिरफ्तार कर लिया गया था। 

 

इससे पहले, ACB ने इस मामले की जांच के लिए एक एफआईआर दर्ज की थी। राज्य सरकार ने एक कमेटी भी बनाई है ताकि इन आरोपों की जांच की जा सके। रविवार को IDFC फर्स्ट बैंक ने ही बताया था कि उसके कर्मचारियों और कुछ अन्य लोगों ने मिलकर हरियाणा सरकार के बैंक खातों से 590 करोड़ रुपये गायब कर दिया है।

 

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कौन-कौन गिरफ्तार हुआ?

 

ACB के डायरेक्टर जनरल ए एस चावला ने बताया है कि बैंक के पूर्व कर्मचारी रिभव ऋषि और पूर्व बैंक मैनेजर अभय कुमार को गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों के अलावा स्वाति सिंगला और अभिषेक सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले रिभव ऋषि के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया था ताकि वह देश छोड़कर भाग न सकें। ACB को शक है कि रिभव ऋषि की इस मामले में अहम भूमिका हो सकती है क्योंकि उन्होंने 6 महीने पहले ही बैंक से इस्तीफा दे दिया था।

 

स्वाति सिंगला रिभव ऋषि की पत्नी हैं और अभिषेक सिंह स्वाति सिंह के भाई हैं। विजिलेंस और ऐंटी करप्शन ब्यूरी के डीजीपी डॉ. अरशिंदर सिंह चावला ने कहा है, 'बैंक ने राज्य सरकार का पैसा लौटा दिया है। आंकड़े इतने बड़े हैं कि इसकी जांच में अभी समय लगेगा। जिन पैसों में गड़बड़ी हुई है उसमें ज्यादातर हरियाणा सरकार के हैं लेकिन कुछ चंडीगढ़ प्रशासन के भी हैं। हम सभी विभागों से इसके बारे में पूछेंगे।'

 

 

 

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मामला चर्चा में आया तो मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में बयान दिया कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा और हरियाणा कांग्रेस के अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने मांग की है कि इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से करवाई जाए। 

 

कैसे खुली पोल?

 

हाल ही में जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना अकाउंट बंद करके दूसरे बैंक में ट्रांसफर कराना चाहा तो पता चला कि पैसे ही कम हो गए हैं। विभाग ने जितने पैसे बताए थे, उतने इन अकाउंट्स में थे ही नहीं। अब सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए इस बैंक के साथ सभी सरकारी लेनदेन पर रोक लगा दी है।