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IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: 100 करोड़ का भाई-बहन से क्या है लिंक?

हरियाणा के IDFC First Bank घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने 100 करोड़ रुपये की हेराफेरी का पता लगा लिया है। दो भाई-बहनों पर इस मामले में शक की सुई जा रही है।

IDFC First Bank

प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit : ChatGpt

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हरियाणा के IDFC फर्स्ट बैंक घोटाले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य के स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने चंडीगढ़ की एक महिला और उसके भाई के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। जांच के दौरान उनकी कंपनी के खाते में करीब 100 करोड़ रुपये के ट्रांसफर का पता चला है। महिला के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया है, जबकि उसके भाई की तलाश जारी है।

 

अधिकारियों के अनुसार, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा के एक पूर्व प्रबंधक के खिलाफ भी लुक आउट सर्कुलर ( LOC ) जारी किया गया है। यह प्रबंधक पंचकूला का निवासी है और छह महीने पहले बैंक छोड़ चुका है। स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो के एक अधिकारी ने बताया कि लुक आउट सर्कुलर का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आरोपी देश छोड़कर न भाग सकें। मामले में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और कुछ लोकसेवकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। बैंक ने बयान जारी करके कहा है कि जांच में शाखा के कुछ कर्मचारियों द्वारा जाली दस्तावेज और फर्जी भुगतान निर्देश क्लियर किए जाने के संकेत मिले हैं जो बाहरी पक्षों की मिलीभगत से हो सकता है।

590 करोड़ के डायवर्जन की जांच

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, जांच एजेंसियों ने हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा जमा कराए गए करीब 590 करोड़ रुपये में से बड़े पैमाने पर धन के डायवर्जन का पता लगाया है। अब जांच का मुख्य सवाल यह है कि क्या यह धन सरकारी विभाग की अधिकृत अनुमति से ट्रांसफर किया गया था या बैंक अधिकारियों ने अपने स्तर पर निर्णय लिया। यदि अनुमति पत्र जारी हुए थे तो क्या अधिकारियों को ऐसा निर्णय लेने का अधिकार था। यह भी जांच का विषय है कि राशि का उपयोग केवल शेयर बाजार में निवेश के लिए हुआ या रियल एस्टेट में भी लगाया गया। 

 

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391 लेनदेन पर सवाल

स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो ने मामले की जांच तेज करने के लिए डीएसपी रैंक के अधिकारी की अगुवाई में विशेष जांच दल (SIT) गठित किया है, जिसकी निगरानी एसपी स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है और जल्द ही गिरफ्तारी की संभावना है। यह एफआईआर 23 फरवरी को पंचकूला स्थित एंटी करप्शन ब्यूरो ( ACB ) थाने में हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी के बाद दर्ज की गई है। मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2) लागू की गई है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक विश्वासघात, साजिश, धोखाधड़ी और जालसाजी से संबंधित धाराएं भी जोड़ी गई हैं।

 

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जांच में विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा 2025 में 50 करोड़ रुपये आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और 25 करोड़ रुपये एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा करने के गंभीर आरोप लगाए है। जांच एजेंसियों ने 170 से अधिक खातों में 391 से अधिक लेनदेन की पहचान की है, जिनमें सरकारी विभागों, बैंक कर्मचारियों और चार वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की भूमिका की जांच की जा रही है।

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