पत्रकार और एक्टिविस्ट गौरी लंकेश एक बार फिर चर्चा में हैं। गौरी लंकेश की 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने कुल 18 लोगों को आरोपी बनायाा था। इन 18 में एक आरोपी श्रीकांत पंगारकर भी था। श्रीकांत पंगारकर ने आज यानी 16 जनवरी को महाराष्ट्र नगर निगम के चुनावों के नतीजों में जीत दर्ज की है। श्रीकांत पंगारकर ने महाराष्ट्र के जालना नगर निगम से पार्षद का चुनाव जीता है।
महाराष्ट्र में बीएमसी समेत कुल 29 नगर निगमों के लिए गुरुवार को मतादान हुआ था। एक दिन बाद आज शुक्रवार को सुबह 10 बजे से वोटों की गिनती जारी है। श्रीकांत पंगारकर ने जालना नगर निगम के वार्ड नंबर 13 से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। आज मतगणना के बाद उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया है।
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बीजेपी को हराकर बने पार्षद
श्रीकांत पंगारकर ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार रावसाहेब धोबले को हराया है। निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, श्रीकांत पंगारकर को 2,661 वोट मिले, जबकि धोबले को 2,477 वोट मिले। पंगारकर ने 184 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की है। शिवसेना को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने पंगारकर के खिलाफ अपने उम्मीदवार उतारे थे। जीत के बाद श्रीकांत पांगरकर ने अपने समर्थकों के साथ जमकर जश्न मनाया।
गौरी लंकेश केस में जमानत पर बाहर
गौरी लंकेश की पांच सितंबर, 2017 को बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या को लेकर देश भर में विरोध किया गया था। अगस्त 2018 में, महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते ने विस्फोटक अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के प्रावधानों के तहत पंगारकर को गिरफ्तार किया था। उन्हें कर्नाटक होई कोर्ट ने 4 सितंबर, 2024 को जमानत दी गई थी।
पंगारकर इससे पहले 2001 से 2006 तक जालना नगर परिषद के सदस्य थे, उस समय शिवसेना का बंटवारा नहीं हुआ था। 2011 में शिवसेना से टिकट न मिलने के बाद, वह दक्षिणपंथी हिंदू जनजागृति समिति में शामिल हो गए।
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2024 में शिंदे के साथ आए
श्रीकांत पंगारकर स्थानीय राजनीति में पकड़ रखते हैं और सालों से राजनीति कर रहे हैं। नवंबर 2024 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना में उन्होंने एंट्री ली थी। शिवसेना के इस फैसले का जमकर विरोध हुआ था। तीखी प्रतिक्रिया के बाद एक दिन के अंदर ही एकनाथ शिंदे ने उन्हें पार्टी में शामिल होने से रोक दिया। हालांकि, इन चुनावों में शिवसेना ने उनके खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारा। टिकट ना मिलने पर श्रीकांत पंगारकर निर्दलीय मैदान में कूदे और अब उन्हें जीत मिल गई है।
