पूर्वोत्तर के राज्य मणिपुर में हिंसा की शुरुआत हुए लगभग तीन साल हो चुके हैं। सैकडों लोगों की जान गई, लाखों लोग विस्थापित हुए, मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दिया, नई सरकार बनी लेकिन तीन साल बीतने वाले हैं और अभी तक राज्य में पूरी तरह शांति नहीं स्थापित हुई है। तमाम कोशिशों के बावजूद आए दिन कोई ने कोई ऐसी घटना घटती है जिसमें लोग मारे जाते हैं, घर जला दिए जाते हैं या फिर तनाव बढ़ जाता है। ऐसा ही कुछ गुरुवार को मणिपुर की राजधानी इंफाल में देखने को मिला। कुछ दिन पहले हुए एक बम धमाके में दो बच्चों की मौत के मामले में गुरुवार को मशाल जुलूस निकाला गया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों की झड़प पुलिस से भी हुई।

 

रिपोर्ट के मुताबिक, मशाल लिए हजारों लोग गुरुवार शाम को करीब 7 बजे सिंगजामेई में रैली में शामिल हुए और उन्होंने बिष्णुपुर जिले के ट्रोंग्लाओबी में 7 अप्रैल को हुए विस्फोट के लिए जिम्मेदार लोगों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। अधिकारियों ने बताया कि कुछ प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों के खिलाफ नारेबाजी की और मौके पर तैनात कर्मियों से अपशब्द कहे। करीब दो किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद रैली चिंगमथक पहुंची जो मुख्यमंत्री के बंगले, पुलिस मुख्यालय और लोक भवन से कुछ किलोमीटर दूर है।

प्रदर्शन और लाठीचार्ज

अधिकारियों ने बताया कि सुरक्ष कर्मियों की संख्या प्रदर्शनकारियों की तुलना में बहुत कम थी। उन्होंने बताया कि सुरक्ष कर्मियों ने प्रदर्शनकारियों से निषेधाज्ञा लागू होने के कारण वापस लौटने को कहा जिसके बाद टकराव की स्थिति बन गई। उन्होंने बताया कि स्थिति तनावपूर्ण होने पर सुरक्षाकर्मियों ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के कई गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। अधिकारियों ने बताया कि कई युवकों ने सुरक्षाकर्मियों पर कथित तौर पर पथराव भी किया जिससे तनाव और बढ़ गया। झड़प में कई लोग घायल हुए हैं और कम से कम पांच लोगों को मामूली चोटों और आंसू गैस के धुएं से सांस लेने में दिक्कत होने के कारण नजदीकी अस्पताल ले जाया गया।

 

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एक अधिकारी ने कहा, ‘कुछ तत्व राज्य में मौजूदा स्थिति का फायदा उठाकर अपने-अपने सरकार विरोधी और सुरक्षा बल विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।’ बता दें कि ट्रोंग्लाओबी बम हमले के बाद भड़के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के मद्देनजर शाम 5 बजे से सुबह 5 बजे तक लोगों के घरों से बाहर निकलने पर रोक लगाने वाला आदेश अब भी लागू है।

जारी हैं हिंसक घटनाएं

हिंसा की सबसे अहम वजह है कि दोनों प्रमुख समुदायों यानी कुकी और मैतेई के बीच इतना गहरा अविश्वास है कि शांति का कोई फॉर्मूला ही नहीं निकल पा रहा है। 7 अप्रैल को बिष्णुपुर में हुए एक बम धमाके में दो बच्चों की मौत ने इस शांति में और खलल डाल दिया है। आरोप है कि कुकी-जो लोगों ने बिष्णुपुर में यह हमला किया था। इसी के चलते मैतेई समुदाय के लोग सड़क पर उतर आए हैं। इस हिंसा में अभी तक कुल 4 लोगों की जान गई है और जोरदार प्रदर्शन भी हुए हैं।

 

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ऐसी घटनाओं के चलते बार-बार मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बंद करनी पड़ी हैं। राजधानी इंफाल और उसके आसपास के इलाके भी ऐसी प्रतिबंधों से लगातार प्रभावित रहे हैं। सरकार लगातार कह रही है कि वह शांति स्थापित करने के प्रयास कर रही है। हालांकि, सच्चाई यह है कि ये प्रयास जमीन पर असर डालने में असफल हुए हैं।

नई सरकार भी नहीं ला पाई शांति

मई 2023 में हिंसा भड़कने के बाद से ही राज्य सरकार निशाने पर थी। तमाम आरोप लगे लेकिन एन बीरेन सिंह ने अपना पद नहीं छोड़ा। आखिर में 13 फरवरी 2025 को उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और मणिपुर में राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। लगभग एक साल राष्ट्रपति शासन लागू रहने के बाद भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने अपने नेता युमनाम खेमचंद सिंह को मुख्यमंत्री बनाया।

 

युमनाम खेमचंद सिंह की सरकार बनने के बाद दो महीने से ज्यादा का समय गुजर चुका है लेकिन अभी भी मणिपुर की स्थिति सामान्य नहीं हुई है। अभी भी कई इलाकों में आए दिन हिंसा की खबरें सामने आ रही हैं।