मणिपुर में मई 2023 में हुए जातीय दंगों के दौरान तमाम परेशानियां हुईं। इनमें से एक 20 साल की कुकी-जो समुदाय की लड़की के साथ भी कथित तौर पर भीड़ ने दुष्कर्म किया था। उस लड़की की एफआईआर तो दर्ज हुई है लेकिन चार्जशीट अभी तक फाइल नहीं हुई है। अब वह इस दुनिया से चली गई। 10 जनवरी 2026 को महिला की मौत हो गई।
कथित तौर पर जब यह घटना हुई तब यह लड़की सिर्फ 18 साल की थी। मई 2025 में इम्फाल के न्यू चेकऑन इलाके में एक एटीएम के पास से उसका अपहरण कर लिया गया था। कुछ महिलाओं ने कथित तौर पर उसे चार हथियारबंद लोगों के हवाले कर दिया, जो किसी घाटी आधारित संगठन से जुड़े थे।
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गैंग रेप का आरोप
इसके बाद कथित तौर पर उसे पहाड़ी पर ले जाया गया, जहां तीन लोगों ने बारी-बारी से उसके साथ गैंग-रेप किया। इसके बाद उसे एक नाले में फेंक दिया गया।
किस्मत से एक ऑटो रिक्शा चालक (जो सब्जी बेचने जा रहा था) ने उसे देख लिया और बचाया। अगले दिन वह इम्फाल से भाग गई। कांगपोकपी अस्पताल में इलाज करवाया, फिर कोहिमा (नागालैंड) और गुवाहाटी (असम) के अस्पतालों में भर्ती रही।
इलाज चल पर ठीक नहीं हुई
इसके बाद कई महीनों तक इलाज चला, लेकिन न ही वह शारीरिक रूप से स्वस्थ हो सकी और नही मानसिक रूप से शांत हो सकी। कथित तौर पर इस घटना के बाद उसे गर्भाशय से जुड़ी गंभीर परेशानी हो गई और मानसिक रूप से बहुत बड़ा मानसिक सदमा लग गया।
इंडिजिनस ट्राइबल लीडर्स फोरम (ITLF) ने बताया कि यह मौत कुकी-जो समुदाय की महिलाओं पर हुए अत्याचारों का एक बड़ा उदाहरण है। पोरोमपाट पुलिस स्टेशन (इम्फाल ईस्ट) में 2.5 साल पहले FIR दर्ज हुई थी, लेकिन आज तक किसी भी आरोपी की पहचान नहीं हुई। केस अभी भी लंबित है।
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ट्राइबल यूनिटी कमेटी ने केंद्र सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द इस लड़की को इंसाफ मिले। उन्होंने कहा कि दोषियों को सजा मिलना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'बेटी बचाओ' के सपने को साकार करने जैसा होगा।
