महाराष्ट्र के नासिक में गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में बवाल मच गया। नासिक के पुलिस परेड ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम के दौरान एक महिला कर्मचारी ने महाराष्ट्र के ग्राम विकास मंत्री गिरीश महाजन के कार्यक्रम में हंगामा किया। जब गिरीश महाजजन ने अपने संबोधन में डॉ. भीम राव आंबेडकर का नाम नहीं लिया तो महिला विरोध जताने के लिए अचानक मैदान की ओर दौड़ पड़ीं। इस घटना की कई वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रही हैं और पूरे देश में इस घटना की चर्चा है।
महिला कर्मचारी माधुरी जाधव की ड्यूटी परेड ग्राउंड में लगी थी और इसी परेड ग्राउंड में आयोजित एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री गिरीश महाजन शामिल हुए थे। माधुरी जाधव ने जब कार्यक्रम में विरोध किया और नारे लगाए तो तुरंत उस पर कार्रवाई की गई। उसके साथ मौजूद अन्य महिला पुलिसकर्मियों ने हंगामा कर रही माधुरी को हिरासत में ले लिया।
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ड्यूटी के दौरान किया हंगामा
माधुरी जाधव को कार्यक्रम में व्यवस्था सुचारू रुप से चले यह देखने की जिम्मेदारी मिली थी लेकिन वह खुद ही हंगामा करने लगे। एक जिम्मेदारी सरकारी पद पर रहते हुए उन्होंने प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया, जिससे पूरी प्रशासनिक हलके में हलचल हो गई। हालांकि, हंगामा करने वाली कर्मचारी को तुरंत हिरासत में ले लिया गया। इस घटना पर मंत्री गिरीश महाजन ने खेद जताया।
बीच में रुका कार्यक्रम
गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान मंत्री गिरीश महाजन के साथ कई सीनियर अधिकारी मंच पर मौजूद थे। मंत्री गिरीश महाजन की स्पीच शुरू होते ही माधुरी जाधव अपनी सीट से उठकर वीवीआईपी क्षेत्र की ओर भागने लगीं। उन्होंने अचानक नारेबाजी भी शुरू कर दी। इस नारेबाजी को सुनकर सभी अधिकारी हैरान रह गए। इस हंगामे के चलते कुछ समय तक कार्यक्रम रोकना भी पड़ा।
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क्या बोली माधुरी?
हंगामा करने वाली माधुरी जाधव वन विभाग में तैनात है। सरकारी सेवा में रहते हुए उन्होंने इस तरह का व्यवार किया है जो गंभीर अनुशासनहीनता की कैटेगरी में आता है। हंगामे के दौरान की एक वीडियो भी सामने आई है। इस वीडियो में माधुरी जाधव कह रही हैं कि बाबासाहेब का मंच से नाम तक नहीं लिया गया। वह काफी गुस्से में दिखाई दे रही थी और कह रही थी कि चाहे उन्हें सस्पेंड भी कर दिया जाए लेकिन वह माफी नहीं मांगेगीं। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने उन्हें पकड़कर गाड़ी में बैठा दिया।
सोशल मीडिया पर इस घटना के बाद अब एक नई बहस छिड़ गई है। एक तरफ तो लोग माधुरी जाधव की इस हरकत को अनुशासनहीनता बता रहे हैं क्योंकि वह सरकारी नौकरी में ड्यूटी पर तैनात थी। वहीं, दूसरी तरफ एक धड़ा ऐसा भी है जो माधुरी जाधव की बहादुरी की तारीफ कर रहा है। लोग सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि संविधान निर्माण में बाबासाहेब का बहुत बड़ा योगदान था और गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम में उनका नाम ना लिया जाना गलत है।
राजनीति हुई तेज
इस घटना के बाद महाराष्ट्र की सियासत में हलचल पैदा हो गई है। प्रकाश आंबेडकर की पार्टी के कुछ कार्यकर्ता माधुरी जाधव के समर्थन में पुलिस स्टेशन पहुंचे और उनकी रिहाई की मांग करने लगे। प्रकाश आंबेडकर ने खुद उनसे फोन पर भी बातचीत की। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी पर दलित विरोधी होने का आरोप लगा रहे हैं।
