संजय सिंह, पटना। मुंगेर के प्रशासनिक गलियारों में गुरुवार का दिन किसी फिल्मी सीन से कम नहीं रहा। जहां एक तरफ आम दिनों की तरह फाइलें चल रही थीं, वहीं दूसरी ओर अचानक ऐसा घटनाक्रम हुआ जिसने पूरे सिस्टम को झकझोर कर रख दिया। निगरानी विभाग की टीम ने प्रमंडलीय आयुक्त कार्यालय में ऐसा जाल बिछाया कि रिश्वतखोरी का खेल रंगे हाथों पकड़ में आ गया।

 

मुंगेर में प्रमंडलीय आयुक्त प्रेम सिंह मीणा के कार्यालय में तैनात पेशकार मुकेश कुमार पर लंबे समय से एक मामले में ‘सेटिंग’ के नाम पर पैसे मांगने की शिकायत मिल रही थी। एक पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर निगरानी विभाग से संपर्क किया और फिर शुरू हुआ एक सुनियोजित ऑपरेशन। निगरानी की टीम ने ट्रैप बिछाया। पीड़ित ने जैसे ही 1 लाख 70 हजार रुपये आरोपी को थमाए, वैसे ही टीम ने पेशकार मुकेश कुमार को रंगे हाथों दबोच लिया। इसके बाद आयुक्त कार्यालय में अफरा-तफरी मच गई। टीम ने मुकेश कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

 

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पूरे सिस्टम पर उठने लगे सवाल

विभागीय सूत्रों का मानना है कि ऐसे मामलों में अक्सर एक व्यक्ति महज एक कड़ी होता है, जबकि असली खेल कहीं बड़ा हो सकता है। यह कार्रवाई मुंगेर में निगरानी विभाग के सबसे चर्चित ट्रैप ऑपरेशनों में से एक है। खास बात यह है कि यह छापेमारी सीधे उस दफ्तर में हुई, जहां से प्रशासनिक फैसले लिए जाते हैं। ऐसे में इस घटना ने पूरे सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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 अधिकारियों की भी बढ़ी बेचैनी 

जानकारों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई आम लोगों में भरोसा पैदा करती है कि अगर वे आवाज उठाएं तो कार्रवाई जरूर होगी। वहीं दूसरी ओर यह भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश भी है कि अब बच निकलना आसान नहीं होगा।