संजय सिंह, पटना: बिहार में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। सम्राट चौधरी की अगुवाई में एनडीए (NDA) सरकार सड़कों पर एक नया चेहरा उतारने जा रही है, जिसका नाम ‘पिंक दीदी’ है। जिसमें महिला पुलिस अधिकारी राज्य में महिलाओं की सुरक्षा का ध्यान रखेंगी। यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि उन हजारों छात्राओं के लिए भरोसे का प्रतीक बनने की तैयारी है, जो हर दिन स्कूल, कॉलेज और कोचिंग के रास्ते में असुरक्षा का सामना करती हैं।

 

राज्य सरकार ने ‘पुलिस दीदी’ को और अधिक सशक्त बनाने के लिए 4700 स्कूटी और बाइक खरीदने की मंजूरी दी है। करीब 66.75 करोड़ रुपये की इस योजना का मकसद महिला पुलिसकर्मियों को तेज, सक्रिय और हर परिस्थिति में पहुंचने लायक बनाना है। अब ये ‘पिंक दीदी’ सिर्फ थानों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि सीधे सड़कों, गलियों और शिक्षण संस्थानों के बाहर नजर आएंगी। इस पहल की सबसे खास बात इसकी रणनीति है।

 

यह भी पढ़ें: 4 महीने में 23 बाघों की मौत, मध्य प्रदेश में क्यों संकट में है टाइगर?

 

जहां पहले अपराध के बाद महिलाओं की सुरक्षा के लिए ऐक्शन लिया जाता था, वहीं अब सरकार पहले से ही सुरक्षा के लिए सक्रिय हो गई है। इसी वजह से महिलाओं की सुरक्षा एक नई दिशा में कदम बढ़ा रही है। स्कूटी और बाइक पर सवार महिला पुलिसकर्मी उन जगहों पर लगातार निगरानी करेंगी, जहां छात्राओं की आवाजाही अधिक होती है। खासकर गर्ल्स स्कूल, कॉलेज और कोचिंग हब इनके मुख्य फोकस में रहेंगे।

 

मनचलों की हरकतों पर रहेगी नजर

स्कूल की  छुट्टी के समय मनचलों की हरकतें लंबे समय से छात्राओं के लिए चिंता का कारण रही हैं। इसे ध्यान में रखते हुए ‘पिंक दीदी’ को दोहरी भूमिका दी गई है। एक तरफ वे वर्दी में नजर आकर अपराधियों में डर पैदा करेंगी, तो दूसरी ओर सादे कपड़ों में रहकर संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगी। किसी भी शिकायत या घटना पर मौके पर ही कार्रवाई की जाएगी।

 

यह भी पढ़ें: चिलचिलाती धूप में कुत्ते को बांधा, कोर्ट ने शख्स पर 1050 रुपये का जुर्माना लगाया

 

सरकार का मानना है कि सुरक्षा सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि सामाजिक विश्वास का आधार भी है। जब छात्राएं खुद को सुरक्षित महसूस करेंगी, तभी वे बिना डर के शिक्षा और अपने सपनों की ओर बढ़ पाएंगी। यही वजह है कि इस योजना को महज पुलिसिंग नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की पहल के रूप में देखा जा रहा है।

 

क्या यह योजना सफल हो पाएगी?

हर नई योजना की तरह इसकी सफलता भी जमीनी कामकाज पर निर्भर करेगी। सरकार का संसाधन उपलब्ध कराना पहला कदम है। असली चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि ‘पिंक दीदी’ हर उस जगह तक पहुंचें, जहां उनकी जरूरत है। इसके लिए मॉनिटरिंग, जवाबदेही और स्थानीय स्तर पर सहयोग की जरूरत होगी, तभी यह योजना सफल हो पाएगी।

 

फिलहाल, बिहार में यह पहल उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है। अगर यह योजना अपने उद्देश्य में सफल होती है तो यह छेड़खानी और उत्पीड़न की घटनाओं पर लगाम कस सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि ‘पिंक दीदी’ का यह पहरा जमीनी हकीकत में कितना असरदार साबित होता है।