बिहार के गोपालगंज में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो शादी-ब्याह के नाम पर नाबालिग बच्चियों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा था। कुचायकोट थाना क्षेत्र में चलाए गए एक बड़े अभियान में पुलिस ने 44 से ज्यादा लड़कियों को चंगुल से छुड़ाया है। इनमें से ज्यादातर बच्चियां पश्चिम बंगाल और असम की रहने वाली हैं। पुलिस के मुताबिक, इन्हें अच्छी जिंदगी, फिल्मों में काम और मोटी कमाई का झांसा देकर डांस ग्रुप (ऑर्केस्ट्रा) के दलदल में धकेला गया था।

 

कुचायकोट इलाके में 15 से अधिक ऑर्केस्ट्रा समूहों पर एक साथ छापेमारी की गई। अभियान की निगरानी अपर पुलिस महानिदेशक अमित जैन और एसपी विनय तिवारी ने की। पुलिस, सामाजिक संस्थाओं और महिला सुरक्षा इकाइयों की संयुक्त टीम ने कार्रवाई के दौरान कई संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया।

 

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जांच में सामने आया कि शादी के मौसम में अलग-अलग राज्यों से किशोरियों को बुलाया जाता था। उनसे भोजपुरी गीतों पर अश्लील डांस कराया जाता था। कई लड़कियों ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि उन्हें नौकरी, फिल्मों और अच्छे भविष्य का सपना दिखाया गया था। कुछ बच्चियों ने यह भी कहा कि जिन लोगों पर उन्होंने भरोसा किया, उन्हीं लोगों ने उन्हें इस धंधे में धकेल दिया।

10 से 17 साल की बच्चियां, कई राज्यों से जुड़े तार

पुलिस के अनुसार, मुक्त कराई गई लड़कियों की उम्र 10 से 17 वर्ष के बीच है। शुरुआती जांच में पश्चिम बंगाल, असम, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों से इस नेटवर्क के संबंध सामने आए हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह का मास्टरमाइंड कौन है और बच्चियों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक कैसे पहुंचाया जाता था। बरामद किशोरियों में राजस्थान की एक लड़की भी मिली है, जो पिछले पांच वर्षों से लापता थी। उसके परिवार को सूचना दे दी गई है। इस खुलासे के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

 

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पहले भी सामने आए थे ऐसे मामले

कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार के कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को शक है कि दलालों, ऑर्केस्ट्रा संचालकों और स्थानीय नेटवर्क के बीच मजबूत सांठगांठ थी। जांच एजेंसियां अब मोबाइल रिकॉर्ड, पैसों के लेन-देन और तस्करी के रास्तों की जांच कर रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब गोपालगंज में ऐसा मामला सामने आया हो। इससे पहले मार्च 2026 में बैकुंठपुर थाना क्षेत्र में छापेमारी कर 10 किशोरियों को मुक्त कराया गया था। उस समय भी ऑर्केस्ट्रा और डांस ग्रुपों की आड़ में बच्चियों के शोषण का मामला सामने आया था।

 

लगातार दूसरी बड़ी कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय यह नेटवर्क लंबे समय से काम कर रहा था। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शादी समारोहों की आड़ में चल रहे ऐसे गिरोहों पर पूरी तरह रोक कब लगेगी।