संजय सिंह, पटना। जदयू ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर जनता दरबार मॉडल को सक्रिय कर दिया है। राजधानी पटना में पार्टी के प्रदेश कार्यालय में अब रोजाना तीन-तीन मंत्री बैठकर आम लोगों की समस्याएं सुनेंगे। इस पहल को सीधे तौर पर जनता से जुड़ाव मजबूत करने और चुनावी माहौल से पहले संगठन को जमीनी स्तर पर एक्टिव करने की रणनीति माना जा रहा है।
पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार के निर्देश पर पूरे सप्ताह का शेड्यूल जारी किया गया है। जदयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने इसकी आधिकारिक सूची जारी की। जन सुनवाई कार्यक्रम रोज सुबह 11:30 बजे से शुरू होगा।
सोमवार: गांव और विकास से जुड़े मुद्दों पर फोकस
सप्ताह की शुरुआत ग्रामीण और निर्माण कार्यों से जुड़े विभागों के मंत्रियों के साथ होगी। सोमवार को ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह और ग्रामीण कार्य मंत्री सुनील कुमार लोगों की शिकायतें सुनेंगे।
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मंगलवार: डिप्टी सीएम समेत कई बड़े चेहरे रहेंगे मौजूद
मंगलवार को डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी, विज्ञान एवं प्रावैधिकी मंत्री शीला मंडल और ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल जनता से मुलाकात करेंगे।
बुधवार: स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन पर सुनवाई
बुधवार को स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, परिवहन मंत्री दामोदर रावत और आपदा प्रबंधन मंत्री रत्नेश सदा जनता दरबार में मौजूद रहेंगे।
गुरुवार: राशन, समाज कल्याण और शराबबंदी से जुड़े मामलों की सुनवाई
गुरुवार को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी, मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी और समाज कल्याण मंत्री श्वेता गुप्ता लोगों की समस्याएं सुनेंगी।
शुक्रवार: डिप्टी सीएम के साथ विकास और अल्पसंख्यक कल्याण पर फोकस
शुक्रवार को डिप्टी सीएम विजेंद्र प्रसाद यादव, योजना एवं विकास मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान जनता से सीधे संवाद करेंगे।
चुनावी ब्रेक के बाद फिर लौटा जनता दरबार
जदयू का जनता दरबार कोई नया प्रयोग नहीं है। जब नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के तौर पर सक्रिय जनता दरबार लगाते थे, तब यह कार्यक्रम उनकी पहचान बन गया था। बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते थे और कई मामलों का मौके पर समाधान भी होता था। हालांकि विधानसभा चुनाव के दौरान यह कार्यक्रम बंद हो गया था। अब इसे दोबारा शुरू कर पार्टी जनता के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटी है।
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सियासी संदेश भी साफ
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक जदयू इस पहल के जरिए दो बड़े संदेश देना चाहती है। पहला, सरकार और संगठन जनता के लिए उपलब्ध हैं। दूसरा, चुनावी माहौल में पार्टी सीधे लोगों की नाराजगी और समस्याओं को समझना चाहती है। पार्टी का दावा है कि तय दिन और समय के अनुसार मंत्री मौजूद रहेंगे, ताकि लोगों को भटकना न पड़े और उनकी समस्याएं सीधे जिम्मेदार लोगों तक पहुंच सकें।