राजधानी दिल्ली में आग और आपात घटनाओं से निपटने वाली दिल्ली फायर सर्विस (DFS) इस समय गंभीर स्टाफ संकट का सामना कर रही है। विभाग में फायर स्टेशन ऑफिसर के करीब 80 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं, जिससे आग बुझाने और रेस्क्यू ऑपरेशन पर असर पड़ने लगा है। हालात ऐसे हैं कि बढ़ती आबादी, ऊंची इमारतों और लगातार बढ़ रही इमरजेंसी कॉल के बीच विभाग सीमित कर्मचारियों के सहारे काम चला रहा है। आखिरी बड़ी भर्ती साल 2011-12 में हुई थी।
दिल्ली फायर सर्विस में स्टेशन ऑफिसर के कुल 90 स्वीकृत पद हैं लेकिन इनमें से सिर्फ 18 पद ही भरे हुए हैं, जबकि 72 पद खाली पड़े हैं। स्टेशन ऑफिसर फायर स्टेशन स्तर पर ऑपरेशन की कमान संभालते हैं और आग बुझाने से लेकर बचाव कार्य तक की निगरानी करते हैं। ऐसे में इन पदों का खाली होना विभाग के लिए बड़ी चिंता माना जा रहा है।
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2011 के बाद नहीं हुई बड़ी भर्ती
जानकारी के अनुसार, स्टेशन ऑफिसर पद पर आखिरी बड़ी भर्ती साल 2011-12 में हुई थी। इसके बाद से विभाग में लगातार कर्मचारियों की कमी बनी रही लेकिन इस अंतर को भरने के लिए कोई बड़ा भर्ती अभियान शुरू नहीं किया गया। अधिकारियों का कहना है कि अब विभाग के अंदर से योग्य कर्मचारियों को प्रमोशन देकर खाली पद भरने पर विचार किया जा रहा है।
दिल्ली फायर सर्विस में कुल 3,633 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 1,030 पद खाली पड़े हैं। वहीं 412 पदों पर संविदा कर्मचारियों की नियुक्ति की गई है। फायर ऑपरेटर कैटेगरी में भी 2,367 पदों में से 552 पद खाली हैं। इनकी कमी को पूरा करने के लिए 312 संविदा फायर ऑपरेटर तैनात किए गए हैं। फिलहाल दिल्ली में 71 फायर स्टेशन संचालित हो रहे हैं, जिनमें 67 रेगुलर और चार डे-टाइम स्टेशन शामिल हैं।
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बढ़ती इमरजेंसी कॉल से बढ़ा दबाव
साल 2025-26 में दिल्ली फायर सर्विस को 36,877 इमरजेंसी कॉल मिलीं, जो पिछले छह वर्षों में सबसे ज्यादा हैं। इनमें 55 प्रतिशत से अधिक मामले आग से जुड़े थे। इसके अलावा सड़क हादसे, रेस्क्यू ऑपरेशन और अन्य आपात स्थितियों के मामलों में भी तेजी आई है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब फायर सर्विस केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि मल्टी-इमरजेंसी रिस्पॉन्स एजेंसी के तौर पर काम कर रही है।