दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम में एक महिला ने अपनी ही सोसाइटी के व्हाट्सऐप ग्रुप में किए गए एक कमेंट को लेकर FIR दर्ज करवाई थी। हाउसिंग सोसाइटी के ग्रुप से निकला यह विवाद अब पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट तक पहुंच गया है लेकिन कोर्ट ने महिला की शिकायत पर दर्ज FIR को रद्द करने का आदेश दे दिया है। महिला की शिकायत थी कि उनकी प्रोफाइल शेयर कर लिखा गया था कि जाने कितने दिनों के बाद सोसायटी में अब चांद निकला। इसी टिप्पणी को लेकर विवाद चल रहा था।
मामला इतना बढ़ गया कि हाई कोर्ट तक पहुंच गया। हाई कोर्ट ने कहा कि जाने कितने दिनों के बाद सोसायटी में अब चांद निकला जैसी टिप्पणी भले ही पसंद की न हो लेकिन इसे कानूनन अश्लीलता अपराध नहीं माना जा सकता।
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कोर्ट ने क्या कहा?
पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की जज जस्टिस शालिनी सिंह नागपाल ने कहा कि क्राइम तभी बनता है जब शब्द ऐसे हों जो यौन रूप से अशुद्ध विचार पैदा करे। इस मामले में ग्रुप में कोई भी ऐसी टिप्पणी नहीं की गई। ऐसे में इस मामले में कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाना प्रक्रिया का दुरूपयोग होगा।
पूरा मामला समझिए
गुरुग्राम की एक हाउसिंह सोसाइटी में एक प्रिंसिपल रहती हैं। हर सोसाइटी की तरह उनकी सोसाइटी का भी एक ग्रुप बना हुआ है। स्कूल की प्रिंसिपल ने आरोप लगाया था कि व्हाट्सऐप ग्रुप में उनकी प्रोफाइल फोटो शेयर की गई। इसके बाद ग्रुप में टिप्पणी की 'कितने दिनों के बाद सोसायटी में अब चांद निकला।' इस कमेंट पर स्कूल की प्रिंसिपल भड़क गई और उन्होंने FIR दर्ज करवा दी। उनका आरोप था कि यह टिप्पणी सेक्शुअल (यौन), अपमानजनक और उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाली थी।
इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि आरडब्ल्यूए चुनाव से पहले उन्हें दबाव में लेने की साजिश है। महिला की शिकायत पर गुरुग्राम पुलिस ने सेक्टर 10 के थाने में FIR दर्ज की थी। इसके बाद आरोपी ने हाई कोर्ट का रुख किया और हाई कोर्ट ने अब FIR रद्द कर दी है।
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हाई कोर्ट ने नहीं माना अश्लील टिप्पणी
इस मामले में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि केवल अपमानजनक या कटाक्षपूर्ण शब्द अश्लील नहीं माने जा सकते, जब तक वे कामुकता या अनैतिक प्रभाव (इमेज) ना पैदा करें। व्हाट्सऐप ग्रुप पब्लिक प्लेस की श्रेणी में आ सकता है लेकिन टिप्पणी में अश्लीलता का होना जरूरी है जो इस मामले में नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि किसी महिला की इज्जत खराब करने का अपराध तभी बनता है जब उसकी यौन गरिमा को ठेस पहुंचाने का स्पष्ट इरादा हो। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए धीरज गुप्ता के खिलाफ दर्ज FIR और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियां रद्द कर दीं। कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि जिस समय कमेंट किया गया, शिकायतकर्ता उस ग्रुप की सदस्य भी नहीं थीं।
