आम आदमी पार्टी 2017 में पंजाब विधानसभा चुनाव पूरी ताकत के साथ लड़ रही थी। नए नवेली पार्टी के प्रचार के लिए दिल्ली से तमाम नेता पंजाब पहुंच रहे थे। पहली बार पंजाब में कोई तीसरी शक्ति उभर रही थी और उस समय AAP सुप्रीमो और उस समय के दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की जनता से एक वादा किया था। वादा था एक दलित को डिप्टी सीएम यानी उपमुख्यमंत्री बनाने का। करीब 32 प्रतिशत आबादी वाले दलित समुदाय से डिप्टी सीएम का वादा कर AAP ने बड़ी चाल चली थी लेकिन जनता का विश्वास नहीं जीत पाई। अब करीब दस साल बाद फिर से AAP को अपना पुराना वादा याद आ गया है और पंजाब में दलित डिप्टी सीएम की चर्चा शुरू हो गई है।
इंडियन एक्स्प्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, AAP पार्टी 2027 विधानसभा चनावों की तैयारी में जुट गई है। चुनाव से पहले पार्टी 32 प्रतिशत आबादी वाले दलित समुदाय को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है और इस कोशिश में अब किसी दलित नेता को डिप्टी सीएम बनाने पर विचार कर रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मुद्दे पर पार्टी के सीनियर नेताओं ने मीटिंग भी की और दो नाम डिप्टी सीएम के लिए रेस में हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि AAP पार्टी जल्दी ही पंजाब कैबिनेट का विस्तार कर सकती है और इसमें डिप्टी सीएम भी शपथ ले सकते हैं।
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मीटिंग कर चुके केजरीवाल
केजरीवाल को अब अपना पुराना वादा याद आ गया है और यह भी कि करीब एक साल बाद पंजाब में फिर से विधानसभा चुनाव हैं। ऐसे में पार्टी लगातार अपने किए वादे पूरे करने में जुट गई है। महिलाओं को 1,00 रुपये की घोषणा भी कर दी गई है। इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, आम आदमी पार्टी 2027 चुनाव से पहले सोशल इंजीनियरिंग कर रही है और इसी के तहत दलित डिप्टी सीएम पर गहनता से विचार किया जा रहा है। इसको लेकर पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल कई मीटिंग भी कर चुके हैं।
कौन बनेगा डिप्टी सीएम?
इंडियन एक्स्प्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि मीटिंग में दो नामों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। इनमें एक नाम वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का है और दूसरा नाम इंडस्ट्री मिनिस्टर संजीव अरोड़ा का है। सूत्रों के अनुसार, पार्टी दलित समुदाय से एक डिप्टी सीएम पद चाहती है क्योंकि दलित पंजाब की जनसंख्या का 32 प्रतिशत हिस्सा हैं। दलितों को पार्टी की ओर आकर्षित करना एक बड़ा टास्क होगा।
2017 में किया था वादा
अरविंज केजरीवाल ने 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले पंजाब की जनता से वादा किया था कि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आती है तो दलित नेता को डिप्टी सीएम बनाया जाएगा। उनके इस वादे के बावजूद भी आम आदमी पार्टी पंजाब में दूसरे नंबर पर रही थी। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी ने बंपर जीत दर्ज की और भगवंत मान सीएम बने। 2022 में पार्टी ने दलित डिप्टी सीएम का वादा नहीं किया था और अब तक चार साल में किसी को डिप्टी सीएम नहीं बनाया।
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अब जब आम आदमी पार्टी पंजाब में दूसरी बार चुनाव जीतने की तैयारी कर रही है तो केजरीवाल अपना पुराना वादा पूरा कर सकते हैं। कुछ जानकारों का कहना है कि पंजाब में उत्तरप्रदेश और महाराष्ट्रा की तरह पार्टी दो डिप्टी सीएम भी बना सकती है। हिंदू समुदाय से एक डिप्टी सीएम बनाने की चर्चा भी चल रही है लेकिन इसको लेकर अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
दलितों की पंजाब में स्थिति
किसी भी राज्य में सबसे बड़ी दलित आबादी पंजाब में हैं। करीब 32 प्रतिशत आबादी दलित समुदाय से संबंध रखती है लेकिन इसके बावजूद दलित पंजाब में कभी कोई बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर नहीं उभर पाए हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण दलितों का बिखराव है। कहा जाता है कि अगर पंजाब में 32 प्रतिशत सिख हैं तो उनमें 32 अलग-अलग गुट हैं। लेखक देसराज काली के अनुसार, अगर दलितों के एक गुट के साथ कुछ गलत हो जाए तो दूसरा गुट उसका साथ नहीं देता है। दलित पारंपरिक रूप से कांग्रेस और अकाली दल के प्रति वफादार रहा है।
