बिहार की राजनीति में एक बार फिर कानूनी कार्रवाई का असर दिख सकता है। साहेबगंज से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक और बिहार सरकार में पूर्व पर्यटन मंत्री रह चुके राजू सिंह को दिल्ली की अदालत ने गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के मामले में दोषी ठहराया गया है और अब उनकी विधानसभा सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा है। अब सबकी नजर अदालत की ओर से सुनाई जाने वाली सजा पर टिक गई है। अगर 2 साल से ज्यादा की सजा हुई तो उनकी विधायकी समाप्त हो जाएगी।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने वर्ष 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में राजू सिंह को दोषी करार देते हुए हिरासत में लेने का आदेश दिया है। अदालत के फैसले के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या बीजेपी विधायक की सदस्यता भी समाप्त हो सकती है।
दो साल से अधिक की सजा बनी तो बढ़ेंगी मुश्किलें
कानूनी जानकारों के अनुसार जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-8 के तहत यदि किसी सांसद या विधायक को दो वर्ष या उससे अधिक की सजा सुनाई जाती है तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो सकती है। ऐसे में यदि अदालत राजू सिंह को दो साल से अधिक की सजा देती है तो बिहार विधानसभा सचिवालय उनकी सदस्यता समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
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पटना हाई कोर्ट के अधिवक्ता आलोक आनंद के अनुसार गैर-इरादतन हत्या के मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 304 (भाग-2) के तहत सात वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। हालांकि, अंतिम सजा का निर्धारण अदालत द्वारा मामले की परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाएगा।
अपील का अधिकार रहेगा लेकिन सदस्यता बचना आसान नहीं
राजू सिंह के पास उच्च न्यायालय में अपील करने का अधिकार रहेगा, लेकिन केवल अपील दाखिल कर देने से सदस्यता स्वतः सुरक्षित नहीं हो जाती। यदि सक्षम न्यायालय दोष सिद्धि या सजा पर रोक लगाता है, तभी उनकी सदस्यता बचने की संभावना बन सकती है।
बिहार की राजनीति में ऐसा उदाहरण पहले भी देखने को मिल चुका है। मोकामा के तत्कालीन विधायक अनंत सिंह को वर्ष 2022 में एमपी-एमएलए कोर्ट द्वारा 10 वर्ष की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त कर दी गई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राजू सिंह के मामले में भी कानूनी प्रक्रिया लगभग इसी दिशा में आगे बढ़ सकती है।
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क्या है पूरा मामला?
31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के वसंत कुंज क्षेत्र में आयोजित एक न्यू ईयर पार्टी के दौरान हर्ष फायरिंग हुई थी। इस दौरान चली गोली से डॉक्टर अर्चना गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। लंबी सुनवाई के बाद 6 जून 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने राजू सिंह को गैर-इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी करार दिया। हालांकि इस मामले में उनकी पत्नी रेणु सिंह समेत राणा राजेश सिंह और रमेंद्र सिंह को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
राजू सिंह की राजनीतिक किस्मत अब अदालत द्वारा तय की जाने वाली सजा पर निर्भर करेगी। यदि सजा दो वर्ष से कम रहती है तो उनकी सदस्यता बच सकती है लेकिन दो वर्ष से अधिक की सजा की स्थिति में विधानसभा सदस्यता समाप्त होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत का फैसला बिहार की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।
