मशहूर गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने तमिल सिनेमा के दो सबसे बड़े सुपरस्टार, कमल हासन और रजनीकांत की कड़ी आलोचना की है। इस विवाद की मुख्य वजह प्रसिद्ध गीतकार वैरामुथु को 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' मिलने पर इन दोनों अभिनेताओं द्वारा दी गई बधाई है। चिन्मयी का मानना है कि यौन शोषण के आरोपी को इतना बड़ा सम्मान देना और बड़े सितारों द्वारा उसका जनता के सामने समर्थन करना उन सभी महिलाओं का अपमान है जिन्होंने उनके खिलाफ आवाज उठाई थी।
हाल ही में अनुभवी गीतकार और कवि वैरामुथु को साहित्य के क्षेत्र में भारत का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' दिया जाएगा। वह यह गौरव हासिल करने वाले तीसरे तमिल लेखक बन गए हैं। इस घोषणा के तुरंत बाद कमल हासन और रजनीकांत ने सोशल मीडिया पर वैरामुथु की जमकर तारीफ की। कमल हासन ने उन्हें अपना मार्गदर्शक और 'मामा' बताते हुए बधाई दी, जबकि रजनीकांत ने उन्हें अपना प्रिय मित्र कहकर इस उपलब्धि पर खुशी जताई।
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क्यों हुआ था मी टू आंदोलन?
चिन्मयी श्रीपदा ने इन बधाई संदेशों पर आपत्ति जताते हुए पुराने 'मी टू' (#Metoo) आंदोलन का जिक्र किया है। उन्होंने याद दिलाया कि साल 2018 में अलग-अलग उम्र की कई महिलाओं ने वैरामुथु पर यौन शोषण और छेड़छाड़ के गंभीर आरोप लगाए थे। चिन्मयी का कहना है कि जब इतने बड़े और प्रभावशाली अभिनेता एक आरोपी की प्रशंसा करते हैं, तो इससे समाज में यह संदेश जाता है कि ताकतवर लोगों के गलत कामों को नजर अंदाज किया जा सकता है।
कमल हासन और रजनीकांत से पूछे तीखे सवाल
चिन्मयी ने विशेष रुप से कमल हासन और रजनीकांत की दोहरी मानसिकता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जो अभिनेता राजनीति में आकर महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण की बातें करते है वह असल जीवन में एक ऐसे व्यक्ति का साथ खड़े हैं जिस पर कई महिलाओं ने आरोप लगाए हैं। चिन्मयी ने लिखा कि अक्सर प्रभावशाली पुरुष अपने भाइयों और दोस्तों का बचाव करते हैं और महिलाओं के दुख को पूरी तरह अनदेखा कर देते हैं।
फिल्म इंडस्ट्री में काम नहीं मिल रहा
चिन्मयी को वैरामुथु के खिलाफ आवाज उठाने के वजह से उन्हें भारी कीमत चुकानी पड़ी। उन्होंने बताया कि आरोपों के बाद उन्हें तमिल डबिंग यूनियन से बाहर कर दिया गया और इंडस्ट्री में काम मिलना लगभग बंद हो गया। चिन्मयी का तर्क है कि जहां एक तरफ पीड़ित महिला को काम से अलग रखा गया, वहीं आरोपी वैरामुथु को लगातार बड़े सरकारी और फिल्मी कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनाकर सम्मानित किया जाता रहा।
चिन्मयी का कहना है कि सिर्फ टैलेंटड होने की वजह से किसी की गलतियों को माफ नहीं करना चाहिए। उनका मानना है कि जब तक बड़े स्टार्स और जिम्मेदार लोग ऐसे आरोपियों को सम्मान देते रहेंगे तब तक महिलाओं को कभी सही इंसाफ नहीं मिलेगा। उन्होंने साफ कहा कि एक अच्छे समाज के लिए यह जरूरी है कि गलत काम करने वाले को सजा मिले न कि उसे बड़ा आदमी बनाकर पेश किया जाए।
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सोशल मीडिया पर लोगों की राय
इस पूरे विवाद को लेकर आम लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स के बीच दो तरह कि बातें हो रही हैं । एक तरफ बड़ी संख्या में लोग चिन्मयी श्रीपदा का समर्थन कर रहे हैं और उनका मानना है कि कलाकारों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी हैं जो वैरामुथु की साहित्य की उपलब्धियों और उनके काम को उनकी निजी विवादों से अलग रखकर देख रहे हैं।
