संजय सिंह, पटना: आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव अपनी आंखों का इलाज कराकर शनिवार को बेटी मीसा भारती के साथ पटना लौट गए थे। इसके बाद रविवार को प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी पटना पहुंच गए हैं। न्यायालय की कार्रवाई, पारिवारिक कलह और कांग्रेस से बढ़ती दूरी के कारण आरजेडी की मुश्किलें फिलहाल कम होती नजर नहीं आ रही हैं। तेजस्वी यादव ने पटना पहुंचने के बाद कहा है कि वे सकारात्मक राजनीति करते हैं। इस कारण सौ दिनों तक सरकार के खिलाफ कुछ नही बोलेंगे। इधर तेजस्वी के आने से पटना में राजनीतिक सरगर्मी भी बढ़ी है। 

 

आरजेडी और कांग्रेस के बीच चुनावी गठबंधन के बाद दूरी बढ़ती जा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने अब पार्टी स्तर पर अपना अलग अभियान और कार्यक्रम चला रखा है। कांग्रेस नेता कह भी चुके हैं कि पार्टी और संगठन को मजबूत करने के लिए अलग से कार्यक्रम चलाना जरूरी है। चुनाव के पहले किसी भी मुद्दे पर कांग्रेस और आरजेडी एक साथ कोई अभियान या मुद्दा खड़ा करती थी। कांग्रेस नेता यह भी आरोप लगा चुके हैं कि विधानसभा चुनाव में खराब प्रदर्शन के लिए आरजेडी ही जिम्मेवार है। आरजेडी ने कांग्रेस के खिलाफ अपने उम्मीदवार खड़े कर दिए थे। जबकि चुनाव के पहले स्पष्ट रूप से सीटों का बंटवारा हो चुका था। राजनीति के जानकार बताते हैं कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम अपनी हार के लिए आरजेडी को ही जिम्मेवार मानते हैं। कांग्रेस नेता दबी जुबान से यह कहते हैं कि पार्टी अध्यक्ष को हराने में आरजेडी कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम है।

 

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रोहिणी की पोस्ट से बढ़ी मुश्किलें 

लैंड फॉर जॉब स्कैम में फंसे लालू का परिवार स्वयं मुश्किलों का सामना कर रहा है। इसी बीच लालू की बेटी रोहिणी आचार्या ने तेजस्वी यादव और उसके करीबी संजय यादव के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। उन्होंने कल अपने एक्स हैंडल पर भावनात्मक पोस्ट लिखा। 

 

जिसमें उन्होंने यह उल्लेख किया है कि बड़ी शिद्दत से बनाई गई विरासत को तहस-नहस करने के लिए बाहरवालों की जरूरत नही पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा है कि अहंकार जब सिर पर चढ़ जाता है, तब विनाशकारी लोग ही सलाहियत और बुद्धि विवेक को हर लेते हैं। जाहिर है रोहिणी का यह पोस्ट तेजस्वी यादव और उनके मित्र संजय यादव के खिलाफ है। 

 

दोनों का नाम लिए बिना रोहिणी ने बहुत कुछ कह दिया है। वे समय-समय पर इस तरह की पोस्ट लिखते रही हैं। उनके इस पोस्ट से आरजेडी की मुश्किलें भी बढ़ती है। दरअसल यह पोस्ट विरासत की लड़ाई है।

तेजप्रताप के भोज से भी बढ़ेगी मुश्किल 

पार्टी और परिवार से निकाले जाने के बाद तेजप्रताप यादव की गतिविधियों के कारण आरजेडी की मुश्किलें बढ़ी हैं। तेजप्रताप यादव ने अपने सरकारी आवास पर मकर संक्रांति भोज का आयोजन किया है। इस भोज में ज्यादातर आमंत्रण बीजेपी और जेडीयू के नेताओं को दिया है। यदि उनका यह भोज सफल हुआ तो आरजेडी की मुश्किलें और बढ़ेंगी।

 

तेजप्रताप समय समय पर अप्रत्यक्ष रुप से तेजस्वी पर हमलावर भी रहे हैं। हाल के दिनों में मां राबड़ी देवी और पिता लालू यादव से मिलकर उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि माता-पिता का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त है।

 

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क्या बोले तेजस्वी यादव 

पटना लौटने के बाद तेजस्वी यादव ने कहा कि डबल इंजन सरकार में अपराध, भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी, पलायन, शिक्षा, चिकित्सा और विधि व्यवस्था का क्या हश्र है यह किसी से छिपा नहीं है। उन्होंने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव में लोक हारा और तंत्र जीता। हम सकारात्मक राजनीति करते आए हैं, इसलिए सरकार गठन के सौ दिन तक नई सरकार की नीतियों, निर्णयों और कार्यक्रम पर कोई टिप्प्णी नही करेंगे, लेकिन लोगों के साथ सरकार के कार्यों की विवेचना करते रहेंगे। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मकर संक्रांति के बाद तेजस्वी यादव अपनी राजनीतिक गतिविधियों को और तेज करेंगे।