बिहार की राजधानी पटना की साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे शातिर साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो सरकारी योजनाओं का झांसा देकर लोगों के नाम पर म्यूल अकाउंट खुलवाता था। इन खातों के जरिए करोड़ों की ठगी का पैसा इधर-उधर किया जाता था। पटना पुलिस ने इस मामले में नालंदा निवासी संजय कुमार और नवादा के अभिषेक कुमार को गिरफ्तार किया है। शुरुआती जांच में 66 लाख रुपये के संदिग्ध ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है।
पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे लोगों को निशाना बनाता था। उन्हें किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने का लालच दिया जाता था। गिरोह पहले लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य जरूरी दस्तावेज हासिल करता था। इसके बाद उन्हीं दस्तावेजों पर बैंक में खाता खुलवाया जाता था लेकिन खाते का पासबुक, एटीएम और मोबाइल नंबर ठग अपने पास रखते थे। यही खाते बाद में 'म्यूल अकाउंट' बन जाते थे, जिनका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को ट्रांसफर करने में किया जाता था।
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इसी तरह आदित्य कुमार शर्मा नामक युवक के दस्तावेजों पर खोले गए खाते में 66 लाख रुपये का बड़ा ट्रांजेक्शन किया गया। जब आदित्य को खाते में संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिली तो उसने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस ने टेक्निकल ट्रैकिंग और डिजिटल कस्टडी लिंक के जरिए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
गर्लफ्रेंड निभाती थी ‘फर्जी सरकारी अफसर’ का रोल
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह का सरगना संजय कुमार अपनी गर्लफ्रेंड की मदद से लोगों को जाल में फंसाता था। संजय की प्रेमिका फोन कर खुद को सरकारी अधिकारी बताती थी और लोगों को योजनाओं के तहत मोटी रकम दिलाने का भरोसा देती थी। जैसे ही लोग भरोसा करते, उनसे बैंक खाता खोलने और योजना में रजिस्ट्रेशन के नाम पर जरूरी दस्तावेज वॉट्सऐप पर मंगवा लिए जाते थे। पुलिस के अनुसार, महिला फिलहाल फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
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गिरफ्तार अभिषेक कुमार ग्रेजुएट है और पटना के जकरियापुर इलाके में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। इसी दौरान उसकी मुलाकात संजय से हुई। पुलिस के मुताबिक, संजय ने उसे कम समय में ज्यादा पैसे कमाने का लालच दिया। धीरे-धीरे अभिषेक पढ़ाई छोड़ साइबर अपराध के नेटवर्क का हिस्सा बन गया। दोनों ने इलाके में खुद को छात्र बताकर किराए पर कमरा लिया था और करीब एक साल से साइबर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।
बड़ा है साइबर सिंडिकेट
साइबर थाना पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपी सिर्फ इस नेटवर्क की एक कड़ी हैं। इनके ऊपर देशभर में फैले बड़े साइबर सिंडिकेट के मास्टरमाइंड सक्रिय हैं, जो अलग-अलग राज्यों में म्यूल अकाउंट के जरिए ठगी की रकम खपाते हैं। पुलिस को आरोपियों से कई अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर विशेष टीमें अन्य सदस्यों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल साइबर अपराधी ठगी की रकम को एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए करते हैं। कई बार खाते असली लोगों के नाम पर खुलते हैं लेकिन उनका नियंत्रण अपराधियों के हाथ में होता है। ऐसे मामलों में खाता धारक भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकता है।
