पिछले दिनों देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाली महायुति सरकार ने 'महाराष्ट्र धर्म स्वतंत्रता विधेयक, 2026' पेश किया। इस बिल को लेकर सत्ताधारी महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी में ठन गई है। राजनीति में पक्ष-विपक्ष के बीच मुद्दों को लेकर ना बनना तो जाहिर सी बात है, लेकिन इसको लेकर विपक्षी महा विकास में ही दो फाड़ हो गया है। 

 

उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) ने महाराष्ट्र धर्म आजादी बिल का समर्थन करने का फैसला किया है। जबकि, महा विकास अघाड़ी के उसके सहयोगी कांग्रेस और NCP (SP) के इस कानून का विरोध किया है। उद्धव ठाकरे की पार्टी के इस कदम ने विपक्षी एकता में फूट पैदा कर दी है।

बिल का समर्थन क्यों?

दरअसल, शिवसेना (UBT) के लिए धर्म-परिवर्तन विरोधी बिल पर उसका रुख पार्टी की विचारधारा और राजनीतिक हिसाब-किताब के हिसाब से फिट बैठती है। पार्टी ने बीजेपी ने अलग होने के बावजूद नरम हिंदुत्व वाली अपनी पुरानी पहचान को बनाए रखा है।

 

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महा विकास अघाड़ी के नेताओं का कहना है, 'हमारे बीच राजनीति में तालमेल है लेकिन धर्म जैसे सोच वाले मुद्दों पर हर पार्टी अपना अलग नजरिया अपना रही है। हमें इसकी पहले से उम्मीद थी।' यह बिल पिछले हफ्ते पेश किया गया। इसके मुताबिक, पुलिस को शक होने पर वह गैर-कानूनी तरीके से धर्म बदलने वाले लोगों पर कार्रवाई कर सकती है, भले ही 'कथित पीड़ित' या उनके परिवार ने शिकायत न की हो।

शिवसेना (UBT) के विधायकों ने क्या कहा?

शिवसेना (UBT) ने बिल का समर्थन कुछ शर्तों के साथ किया। विधानसभा में शिवसेना (UBT) के विधायक भास्कर जाधव ने इस कानून का समर्थन किया और इसके एक क्लॉज में सुधार का सुझाव भी दिया। पार्टी के वरिष्ठ विधायक अनिल परब ने कहा कि उनकी पार्टी बिल का समर्थन करेगी। उन्होंने सवाल किया कि क्या यह 'एंटी-कन्वर्जन बिल या दलबदल-टाइप कानून' के तौर पर काम करेगा। 

 

उन्होंने सरकार से धर्म परिवर्तन के पैमाने और कारणों पर डेटा भी मांगा। अनिल परब ने कहा, 'गरीबी और प्रशासनिक नाकामियां धर्म परिवर्तन के लिए हालात बनाती हैं। अगर ऐसे मामले बढ़ रहे हैं, तो सरकार को बताना चाहिए कि ऐसा क्यों हो रहा है? ऐसे मामले सरकार की नाकामी को दिखाते हैं, जहां राज्य का सिस्टम कमजोर तबके तक नहीं पहुंचता है।'

उद्धव ठाकरे ने अपनाया नरम रुख

वहीं, इस मामले पर पार्टी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने नरम रुख अपनाया। उन्होंने कहा, 'धर्म की आजादी सभी को होनी चाहिए… लेकिन अगर कोई जबरदस्ती या किसी की मजबूरी का फायदा उठाकर और उन्हें झूठा लालच देकर धर्म बदल रहा है, तो हम इसके खिलाफ हैं। हम उस बिल का पूरा समर्थन करते हैं।'

 

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ठाकरे के इस बयान के बाद यह बिल दोनों सदनों में पास हो गया है। इसमें शिवसेना (UBT) ने बिल का समर्थन किया, जबकि कांग्रेस, एनसीपी शरद पवार सहित दूसरी विपक्षी पार्टियों ने इसका विरोध किया। विपक्ष ने मांग की थी कि बिल को जॉइंट सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए।

कई मुद्दों पर रही असहमति

इस बिल पर असहमति कोई पहली बार हुई असहमति नहीं है। इससे पहले नवंबर 2024 के विधानसभा चुनावों के बाद MVA को मिली हार के बाद भी आई थी। विपक्षी गठबंधन ने हाल के नगर निकाय चुनाव में भी एक साथ नहीं लड़े थे। इसकी वजह से गठबंधन को हार मिली और चुनाव के बाद का तालमेल भी सीमित रहा है।

 

विपक्ष के नेता के पद को लेकर भी विधानसभा स्पीकर के पास कोई जॉइंट डेलीगेशन नहीं गया है। साथ ही बजट सेशन से पहले विपक्ष की जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी NCP (SP) के नेता शामिल नहीं हुए थे। इन घटनाक्रमों को लेकर महा विकास अघाड़ी के भविष्य को लेकर चिंता पैदा हो गई है।