उत्तर प्रदेश के हाथरस जिले के गराव गढ़ी गांव से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहां एक पिता ने अपने ही बेटे और बहू पर धर्म परिवर्तन का संदेह होने पर उन्हें न केवल प्रताड़ित किया, बल्कि पंचायत बुलाकर सरेआम जूतों की माला पहनाकर अपमानित भी किया। पिता को इस बात का शतक तब हुआ जब बेटे ने प्रसाद नहीं खाया। इस अमानवीय कृत्य का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता और छोटे बेटे को गिरफ्तार कर लिया है।

 

घटना की शुरुआत तब हुई जब 40 वर्षीय बलराम सिंह अपनी पत्नी और बच्चे के साथ आगरा से अपने पैतृक गांव लौटे। आगरा में रहकर मेलों में झूला चलाकर अपना गुजर-बसर करने वाले बलराम के व्यवहार में पिता शिवराज सिंह को कुछ बदलाव नजर आए। पिता का दावा था कि उनका बेटा अब हिंदू रीति-रिवाजों से दूर हो रहा है। इसी शक ने एक ऐसी चिंगारी का रूप ले लिया, जिसने पूरे परिवार की गरिमा को सरेआम नीलाम कर दिया।

 

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पिता शिवराज सिंह के अनुसार, गांव लौटने के बाद बलराम ने मंदिर का प्रसाद लेने से इनकार कर दिया और बड़ों को पारंपरिक तरीके से नमस्ते करना भी बंद कर दिया। पिता को लगा कि बलराम और उसकी पत्नी मीना ने ईसाई धर्म अपना लिया है। सोमवार को इसी बात पर घर में भारी विवाद हुआ। पिता ने बेटे पर धर्म छोड़ने का आरोप लगाया, जबकि बलराम इन दावों को नकारता रहा। विवाद इतना बढ़ा कि मामला घर की दहलीज पार कर पंचायत तक पहुंच गया।

जूतों की माला पहनाकर किया अपमानित

ग्रामीणों की मौजूदगी में बुलाई गई पंचायत में पिता ने अपने ही बेटे के खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाने की मांग की। हद तो तब हो गई जब पंचायत ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर पति-पत्नी को जूतों की माला पहनने पर मजबूर किया। इस दौरान छोटे भाई ताराचंद ने भी अपने बड़े भाई के साथ मारपीट की। भीड़ तमाशबीन बनी रही और कुछ लोगों ने इस पूरे अपमानजनक घटनाक्रम का वीडियो बनाकर इंटरनेट पर साझा कर दिया।

 

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वीडियो वायरल होते ही हाथरस पुलिस सक्रिय हुई और मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। मुरसान क्षेत्र के क्षेत्राधिकारी योगेंद्र कृष्ण नारायण ने बताया कि इस अपमानजनक कृत्य के लिए शिवराज और ताराचंद के खिलाफ बीएनएसएस (BNSS) की धारा 170 के तहत प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस अब उन अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है जो पंचायत में मौजूद थे और जिन्होंने इस शर्मनाक घटना को बढ़ावा दिया।