पश्चिम बंगाल के मालदा जिले वोटर लिस्ट से नाम कटने पर लोग भारी नाराज हो गए हैं। नाराजगी इतनी बढ़ी कि 1-2 अप्रैल को सौकड़ों की संख्या में लोगों ने चुनाव अधिकारियों का घेराव कर लिया और हाइवे ब्लॉक कर दिया। मामला मालदा के कालियाचक ब्लॉक की है। यहां सुजापुर, मोथाबाड़ी में सैकड़ों लोगों ने सड़क पर चक्काजाम कर दिया और प्रदर्शन पर उतर आए।

 

दरअसल, बुधवार को कुल 7 जुडिशियल अधिकारी (JO)  वोटरों के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन करने गए थे। इसमें 4 महिला अधिकारी भी शामिल थीं। जिन लोगों के नाम कटे हैं उनकी शिकायतों पर बीडीओ ऑफिस में सुनवाई हो रही थी। उसी समय स्थानीय लोगों ने अधिकारियों का घेराव कर लिया।

 

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मामला क्या है?

घेराव करने के बाद सभी चुनाव अधिकारी लगभग 8 घंटे तक ऑफिस में ही रहे और आखिरी में उन्हें पुलिस को बुलाना पड़ा। इस दौरान पुलिस वाहन पर हमला भी हुआ, जिसमें ड्राइवर घायल हो गया। अब यह मामला पूरे राज्य में राजनीतिक मुद्दा बन गया है।

ओपी राजभर ने क्या कहा है?

मामले पर उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इसकी निंदा करते हुए समाजवादी पार्टी पर हमला किया है। राजभर ने कहा कि जो लोग बंगाल गए हैं वह लोग दुखी हैं। जंगलराज जिस तरह से उत्तर प्रदेश सरकार में सपा की गुंडागर्दी थी, उससे भी बदतर हालात बंगाल में हैं।   

 

 

 

सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया

हालांकि, इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने इस घटना को 'चुनाव प्रक्रिया बाधित करने की कोशिश' बताया और बंगाल सरकार को नोटिस जारी किया है। बीजेपी ने इसके लिए ममता बनर्जी को जिम्मेदार बताया है। लेकिन टीएमसी का कहना है कि वह घेराव का समर्थन नहीं करती है लेकिन बीजेपी और चुनाव आयोग के लोग ही जनता को उकसा रहे हैं।

 

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दरअसल, मालदा जिला मुस्लिम बहुल क्षेत्र है। इसलिए यह विवाद और संवेदनशील हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने कहा है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाना जानबूझकर किया जा रहा है। यह टारगेटेड है। पार्टी का कहना है कि लिस्ट से नाम काटना खासकर अल्पसंख्यक वोटरों के खिलाफ है।