मणिपुर में पिछले कुछ महीनों से जारी शांति एक बार फिर हिंसा की भेंट चढ़ गई है। प्रतिबंधित कुकी उग्रवादी समूह यूनाइटेड कुकी नेशनल आर्मी (UKNA) के सदस्यों ने एक 38 वर्षीय मैतेई व्यक्ति का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी है। यह घटना 21 जनवरी (बुधवार) देर रात चुराचांदपुर में कुकी के सदस्यों ने मयंगलांगबम ऋषिकांत का उनकी पत्नी चिंगनु हाओकिप के साथ अपहरण कर लिया। बाद में ऋषिकांत की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
ऋषिकांत मूल रूप से मैतेई बहुल काकचिंग जिले के रहने वाले थे लेकिन अपनी कुकी पत्नी के साथ चुराचांदपुर में रह रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, UKNA के हथियारबंद लोग इस जोड़े को अगवा कर ले गए और वहां इस घटना को अंजाम दिया।
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अधिकारियों ने क्या बताया?
अधिकारियों के अनुसार, UKNA के सदस्यों ने जोड़े को चुराचांदपुर के तुइबुओंग से अगवा कर नाटजांग ले गए। अगवा करने के बाद ऋषिकांत को गोली मार दी गई। उनकी पत्नी ने बताया कि उन्हें गाड़ी से बाहर फेंक दिया गया था, जिसके बाद उनके पति की हत्या की गई।
रहने पर विवाद
ऋषिकांत नेपाल में रहते थे। 19 दिसंबर को ही मणिपुर आए थे। वे चुराचांदपुर में छिपकर रह रहे थे। एक अधिकारी के अनुसार, उनकी पत्नी ने उग्रवादी संगठन 'कुकी नेशनल ऑर्गनाइजेशन' (KNO) से अपने पति के साथ रहने की अनुमति मांगी थी। हालांकि, KNO ने इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि जोड़े ने ऐसी कोई अनुमति नहीं ली थी। पुलिस ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है और ऋषिकांत का शव बरामद कर आगे की जांच शुरू कर दी है।
अधिकारियों का कहना है कि UKNA राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने में बाधा डाल रहा है। यह समूह सरकार की पुनर्वास पहल के तहत अपने घरों में लौटे आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के घरों पर गोलीबारी करने में शामिल रहा है।
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2025 से राज्य में राष्ट्रपति शासन
यह हत्या राज्य में राष्ट्रपति शासन की अवधि (12 फरवरी) खत्म होने से कुछ दिन पहले हुई है। मणिपुर में पिछले साल फरवरी से राष्ट्रपति शासन लागू है। पिछले हफ्ते सुरक्षा बलों ने चुराचांदपुर के जंगलों में UKNA के कैंपों को नष्ट किया था। यह समूह सरकार के साथ किसी भी शांति समझौते का हिस्सा नहीं है। इसके कैंप म्यांमार सीमा के पार भी मौजूद हैं। सरकार वर्तमान में तीन चरणों में विस्थापितों के पुनर्वास का काम कर रही है, जिसमें आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त घरों से लेकर नए घर आवंटन तक की प्रक्रिया शामिल है।
राज्य की भौगोलिक स्थिति के अनुसार, मैतेई समुदाय मुख्य रूप से इंफाल घाटी के मैदानी इलाकों में रहता है जबकि कुकी समुदाय पहाड़ियों में। हिंसा की शुरुआत के बाद दोनों समुदायों ने अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में शरण ले रखी है।
