ठाणे नगर निगम चुनाव से पहले महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। टिकट की होड़ और सत्ता की राजनीति के बीच एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने दल-बदल की संस्कृति और आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेताओं को लेकर राजनीतिक दलों की नीयत पर बहस छेड़ दी है। महज आठ दिनों के भीतर दो बार पार्टी बदलने और तीसरी पार्टी से टिकट हासिल करने वाले एक उम्मीदवार की कहानी ने चुनावी माहौल को गर्मा दिया है। जहां एक ओर वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गंभीर आपराधिक मामलों में घिरे व्यक्ति को उम्मीदवार बनाए जाने से राजनीतिक दलों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठने लगे हैं।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब ठाणे नगर निगम की 131 सीटों के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होता जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी, शिंदे गुट की शिवसेना, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी), एमएनएस, कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी, सभी दल अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं। इसी बीच एक उम्मीदवार का बार-बार दल बदलकर आखिरकार टिकट हासिल कर लेना न सिर्फ चुनावी राजनीति की सच्चाई को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सत्ता की दौड़ में सिद्धांत और नैतिकता किस तरह पीछे छूटती जा रही है। मतदान से पहले सामने आया यह घटनाक्रम ठाणे की राजनीति में हलचल मचाए हुए है और मतदाताओं के बीच भी गंभीर चर्चा का विषय बन गया है।
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आठ दिन में बदली तीन पार्टियां बदलने वाले मयूर शिंदे कौन हैं?
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव से पहले एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। एक ऐसा व्यक्ति, जिसका आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा है, उसने महज आठ दिनों के भीतर दो बार पार्टी बदली और तीसरी पार्टी में जाकर आखिरकार चुनाव का टिकट हासिल किया।
ठाणे में जहां पुराने और वफादार पार्टी कार्यकर्ता टिकट न मिलने से नाराज दिखे, वहीं मयूर शिंदे ने 30 दिसंबर को नामांकन दाखिल किया। यह नामांकन की आखिरी तारीख थी और उन्होंने अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा।
मयूर शिंदे 22 दिसंबर तक एकनाथ शिंदे की शिवसेना में सक्रिय थे। इसके अगले ही दिन, 23 दिसंबर को उन्होंने राज्य बीजेपी अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की मौजूदगी में भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया। शिंदे को उम्मीद थी कि बीजेपी उन्हें सावरकर नगर (वार्ड नंबर 14) से टिकट देगी लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने आखिरी वक्त में पार्टी छोड़ दी और अजित पवार की एनसीपी में शामिल हो गए, जहां उन्हें आखिरकार उम्मीदवार बना दिया गया।
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मयूर शिंदे पर आरोप
मयूर शिंदे पर हत्या, हत्या की कोशिश और रंगदारी जैसे गंभीर आरोप हैं। उनके खिलाफ पहले महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत भी कार्रवाई हो चुकी है। वह तब भी सुर्खियों में आए थे, जब उन्हें उद्धव ठाकरे गुट के वरिष्ठ नेता संजय राउत को कथित तौर पर धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इससे पहले, साल 2017 में भी उन्होंने तब की अविभाजित शिवसेना से टिकट मांगा था लेकिन उस समय भी उन्हें टिकट नहीं मिला था।
क्या है ठाणे के नगर निगम चुनाव की स्थिति
उधर, ठाणे नगर निगम की 131 सीटों के लिए होने वाले चुनाव में बीजेपी 40 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 87 सीटों पर मैदान में है। मुंबई की तर्ज पर ठाणे में भी राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) और उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) ने गठबंधन किया है। वहीं कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी ने सभी 131 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
ठाणे नगर निगम चुनाव के लिए मतदान 15 जनवरी को होगा और मतों की गिनती अगले दिन की जाएगी।
